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बुधवार, 15 दिसंबर 2010

astrology vaastu course

If you are on a visit to HARIDWAR OR DELHI at present or are going to visit HARIDWAR OR DELHI in coming months ...
and want to obtain Astrological .Vaastu Consultation from VAASTU ACHARYA AVTAAR SINGH in person or want to learn VEDIC ASTROLOGY (Horoscope Reading) VAASTU OR FENG SHUI, OR NUMEROLOGY, RUDRAKSH THEREPY ....
  but are unable to come to centre in HARIDWAR OR DELHI  then you can request to come to your office for your purpose.
09013203040

रविवार, 5 दिसंबर 2010

vaastu

Most people r not able to choose or design their own building to live or work in. However , we r probaly in a position to make changes to our work enviorment that will make our life more pleasant n enjoyable.
vaastu acharya
astropujacentre@gmail.com

karz mukti ke upaae

क़र्ज़ मुक्ति के उपाए

गृह के मुख्या द्वार पर श्री दुर्गा बीसा यंत्र स्थापित करें
ओर नित्य धूप दीप अर्पित करे तो क़र्ज़ मुक्ति में
सहायता मिल सकती है
वास्तु आचार्य
९०१३२०३०४०

vaastu

किसी व्यक्ति  वस्तु, स्थान, देश आदि को जानने और सरलता से उसे पहचानने हेतु प्राचीन कालसे उसके नामकरण की प्रथा रही है। जिसका उल्लेख वेद पुराणों में मिलता है।
रामायण काल में भी नाम रखने का उल्लेख इस चौपाई से मिलता हैः-
नामकरन कर अवसरू जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी॥

numerology+++++

एस्ट्रो न्यूमरोलॉजी में नेम थेरेपी

एस्ट्रो न्यूमरोलॉजी में नेम थेरेपी
किसी व्यक्ति वस्तु, स्थान, देश आदि को जानने और सरलता से उसे पहचानने हेतु प्राचीन काल से उसके नामकरण की प्रथा रही है। जिसका उल्लेख वेद पुराणों में मिलता है। रामायण काल में भी नाम रखने का उल्लेख इस चौपाई से मिलता हैः-

नामकरन कर अवसरू जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी॥

अर्थात्‌ जब महाराज दशरथ जी के यहाँ यज्ञादि प्रयासों द्वारा साक्षात्‌ श्री हरि ने नर अवतार धारण किया तब वह नामकरण के लिए गुरु को बुलावा भेजते हैं। बड़े ही सोच-विचार कर ग्रहादि स्थिति को समझ कर महर्षि वशिष्ठ जी ने चारों भाइयों का नाम रखा। जिसमें बड़े भाई का नाम इस चौपाई द्वारा व्यक्त किया गया है।

जो सुख धाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा॥

इसी प्रकार भविष्य संबंधी पुराणों में तथा ज्योतिष ग्रंथों में नाम रखने के संदर्भ में वर्णन मिलता है। ज्योतिष के माध्यम से किसी जातक के जन्म समय के ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति से बालक/ बालिका का नामाक्षर निकालकर उसका नामकरण किया जाता है। इसी प्रकार अंकशास्त्र में भी नाम नंबर, उसका प्रभाव, लाइफ पाथ नंबर आदि का विचार किया जाता है। जो कि उस व्यक्ति, वस्तु, स्थान, देश, पदार्थ, संस्था, व्यवसाय, कारोबार को प्रभावित करते हैं।

नामकरण की विधा आज इतने लंबे अन्तराल के बावजूद भी अपने प्रभाव को कायम रखे हुए है। विज्ञान के क्षेत्र में भी यह आसानी से देखा जा सकता है कि वैज्ञानिक किसी खोज का नाम रखते समय बड़ी सावधानी बरतते हैं। उसे एक ऐसा नाम देते हैं जिससे उसे न सिर्फ सरलता से पहचाना जा सके बल्कि उसके महत्व को आसानी से बढ़ाया जा सके।
आज के बदलते परिवेश में जहाँ लोग बिना सोचे-समझे ही बालक/बालिकाओं के नाम रख देते हैं। जिनका उच्चारण व अर्थ तो जटिल होते ही हैं। साथ ही ग्रह-नक्षत्र व अंकशास्त्र की अंकीय शक्ति उस व्यक्ति, संस्था, स्थान, देश, व्यावसाय को हानि पहुँचाते हैं।
नेम थेरेपी अंग्रेजी का शब्द है जिसकी उपयोगिता जीवन के विश्लेषण और सुधार से है। सरल शब्दों में व्यक्ति के नाम को सुधार कर उसके भाग्य में वृद्धि की जा सकती है। उसके प्रभाव से व्यक्ति अंकीय शक्ति से संचालित ब्रह्मांड की लौकिक ऊर्जा प्राप्त कर सकता है।
नामाक्षर व अंक प्रभाव बड़ा ही चमत्कारी है। यदि किसी व्यक्ति का नामाक्षर और नामांक संयोग से अनुकूल है तो वह सेहतमंद रहते हुए विकास की राह पर बढ़ता है। उसके आचार-विचार व व्यवहार बड़े ही लोकप्रिय होते हैं। वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी में आपसी प्यार व सहयोग रहता है। माता-पिता, भाई-बहन व अन्य परिजनों के साथ उसका तालमेल बना रहता है। वह व्यापारिक और सामाजिक रिश्ते बड़ी ही कुशलता से निभा लेता है।
किन्तु जिस व्यक्ति का नामाक्षर व नामांक आदि सही नहीं है वह कई प्रकार की पीड़ाओं, रोग आदि से ग्रस्त रहता है। उसके आचार-विचार व व्यवहार उपयुक्त नहीं होते। दाम्पत्य जीवन में कलह बढ़ने लगता है। व्यावसायिक व सामाजिक रिश्तों को सही ढंग से कायम नहीं रख पाता।
नेम थेरपी के अन्तर्गत जातक के जन्म, समय व स्थान आदि पहलुओं का मूल्यांकन कर आवश्यकतानुसार उसे बदला जाता है। उसमें नए अंक व नामाक्षर द्वारा नई ऊर्जा का संचार किया जाता है।
नेम थेरेपी से दाम्पत्य जीवन के झगड़ों को समाप्त करने में आश्चर्यजनक सफलता प्राप्त हुई है। अक्षर व अंकों को जोड़कर तालमेल स्थापित करने में नेम थेरेपी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर बिजनेस, ग्लैमर और फैशन की दुनिया में इस थेरेपी ने खासा कमाल दिखाया है।
इसी प्रकार सेहत, माता-पिता, व्यक्तिगत रिश्तों तथा व्यावसायिक रिश्तों में नेम थेरेपी से मधुरता लाई जा रही है। आमदनी बढ़ाने और इच्छित प्रतियोगी क्षेत्रों में सफलता हेतु भी यह विधा बहुत सहायक है।
आज कई नाम लेखन, राजनीति, कानून, आध्यात्म, संगीत, नृत्य, फिल्म, अभिनय, व्यापार, कला, उद्योग जगत में प्रख्यात हैं।
कुछ शख्सियतों को नामाक्षर व नामांक की शक्ति ने इतना लोकप्रिय बना दिया कि देश-विदेश में उनके असंख्य प्रशंसक हैं।
नेम थेरपी द्वारा आप भी नाम व नामांक की शक्ति को जान सकते हैं।
ACHARYA
VAASTU AVTAAR
09013289566
09013203040
09868216175

kaal sarp yoga

लाल
किताब कालसर्प को योग मानता है.
राहु और केतु विभिन्न खानों में बैठकर 12 तरह के
विशेष योग बनाते हैं
अन्य ग्रह अलग अलग खानो में बैठकर शुभ और
...अशुभ फल देते हैं
राहु केतु भी शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के फल
देते हैं.
ज्योतिष में राहु को सांप का सिर और केतु को उसका दुम
माना गया है.
कुण्डली में
सूर्य से लेकर शनि तक सभी सात ग्रह जब राहु और
केतु के बीच होते हैं तब कालसर्प योग बनता है.

manglik yog

चूंकि विवाह के बाद सभी दाम्पत्य जीवन में सुख की कामना करते है.
जबकि
मांगलिक योग से इन इसमें कमी होती है.
जब मंगल कुंण्डली के लग्न,
द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में स्थित होता है
...तो व्यक्ति
मांगलिक होता है.
परन्तु मंगल का इन भावों में स्थित होने के अलावा भी
मंगल के कारण वैवाहिक जीवन के सुख में कमी आने की अनेक संभावनाएं बनती है.

manglik vichar

अनेक बार ऎसा होता है कि कुण्डली में मांगलिक योग बनता है.
परन्तु कुण्डली
के अन्य योगों से इस योग की अशुभता में कमी हो होती है.
अपूर्ण जानकारी के कारण अपने मन में मांगलिक योग से प्राप्त होने
वाले अशुभ प्रभाव को लेकर भयभीत होते रहते है.
... विवाह के बाद एक
नये जीवन में प्रवेश करते समय मन में दाम्पत्य जीवन को लेकर किसी भी
प्रकार का भ्रम नहीं रखना चाहिए.
ANY ??? ASK>> 9013289566

rahukaal

राहु-काल व्यक्ति को सावधान करता है. कि यह समय अच्छा नहीं है
इस समय में
किये गये कामों के निष्फल होने की संभावना है.
इसलिये, इस समय में कोई भी
...शुभ काम नहीं किया जाना चाहिए.
कुछ लोगों का तो यहां तक मानना है की इससे
किये गये काम में अनिष्ट होने की संभावना रहती है.

raahukaal

दक्षिण भारत में प्रचलित:
राहु काल का विशेष प्रावधान दक्षिण भारत में है.  यह
सप्ताह के सातों दिन निश्चित समय पर लगभग डेढ़ घण्टे तक रहता है. इसे अशुभ
...समय के रुप मे देखा जाता है. इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को
यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है.

rahukaal

राहु काल अलग- अलग स्थानों के लिये अलग-2 होता है. इसका कारण यह है की
सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है. इस
सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने
से ज्ञात किया जाता है.

 

raahukaal

Avtar Singh Singh राहु काल के समय में किसी नये काम को शुरु नहीं किया जाता है
जो काम इस समय से पहले शुरु हो चुका है उसे राहु-काल के समय
में बीच में नहीं छोडा जाता है.
कोई व्यक्ति अगर किसी शुभ काम को इस समय
में करता है तो यह माना जाता है की उस व्यक्ति को किये गये काम का शुभ फल
...नहीं मिलता है.
उस व्यक्ति की मनोकामना पूरी नहीं होगी. अशुभ कामों के
लिये इस समय का विचार नहीं किया जाता है.

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

maah shivratri

aap sab bhagat jan ko maah shivraatri par shubh kaamnaaon ke sath 
vaastu acharya

RUDRAKSH

एक मुखी रुद्राक्ष : 
मानसिक अशांति ,शत्रुओ के षड्यांतर से निर्भय 
आर्थिक समृधि सर्व कार्य सीधी प्राप्ति हेतु 
परमतत्व ओर सहज ही इश्वर प्राप्ति के लिए 
दो मुखी रुद्राक्ष :
अर्धनारीश्वर को प्रसन करने के लिए 
तीन  मुखी रुद्राक्ष : 
अग्नि रूप त्रि मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से ब्रह्म हत्या जेसे ज्घन्ये अपराध से मुक्त करने की शक्ति देता है 
चार मुखी रुद्राक्ष ::
ब्रह्मसवरूप उत्तम आरोग्य  की प्राप्ति के लिए उत्तम अति उत्तम महाज्ञान शुधि ओर सम्पति के नियत मानव को धारण करना चाहिए
पांच मुखी रुद्राक्ष : 
इस रुदार्कालाग्नी  पंच्ब्रह्म रुद्राक्ष को धारण करने से शिव खुश हो जाते हैं 
जहां शिव सदाशिव खुश हो जाएं क्या कुछ मांगने की बात रह जाएगी ? 
छ मुखी रुद्राक्ष : 
कार्तिकेय देव ओर गणेश जी के इस रुद्राक्ष के धारण करने वाले भगत पर प्रसन हो जाते हैं  
सात मुखी रुद्राक्ष :  
सूर्य देव सप्तरिशी ओर सात माता सभी का आशीर्वाद मिलता है, शनि देव भी प्रसन कोटे हैं  ओर माँ लक्ष्मी  जी  
की प्राप्ति के साथ ज्ञान प्राप्ति होती है 
शेष फिर  >>>>>>
आप सब का कल्याण हो 
जय शिव भोले 
वास्तुअचार्य 
अवतार सिंह 
९०१३२०३०४०

RUDRAKSH

प्रभु भोले शंकर सदा शिव का प्रिय आभूषण रुद्राक्ष ही तो है 
रक्त विकार को दूर करते हुए रक्तचाप को नियंत्रित करके हिर्देय
रोग व् अन्य मानव शरीर  के  ताप ख़तम करने की शक्ति प्रसाद रूप में रुद्राक्ष ही तो देते हैं 
मानसिक वैचारिक शारीरिक ओर अध्यात्मिक उर्जा से भरपूर शक्ति तो हम सब को 
यह शिव के प्राकर्तिक रूप का प्रशाद रुद्राक्ष के रूप में ही प्राप्त हो सकती है  
फिर क्यूं हम नकारात्मक शक्ति से 
भरकर इन रुद्राक्ष का प्रशाद सवीकार नहीं करते   ज्ञान की कमी है या विश्वाश की   आप जाने 
लेकिन रुद्राक्ष की शक्ति कम नहीं हो सकती 
जेसे समयानुसार कोई भी दवा काम करती है रोग के बाद जाने पर दवा काम कम करेगी वेसे ही  
समय पर रोग आने से पहले ,किसी समस्या के उभरने से पहले दवा ले ली जाए उसी परकार
अपनी जन्म लगन ,चंदर ,सूर्य कुंडली के अधर पर जीवन में आने वाली समस्याओं  का 
समाधान करने के लिए रुद्राक्ष धारण करने का शुभ प्रभाव देखा गया है 
हाँ कुछ लोग प्रशन करते हैं की रुद्राक्ष धारण करने पर नियमो का पालन करना पड़ेगा >> जेसे नशा आदि छोड़ना पड़ेगा ( अगर आप जानते ही हैं की यह बुरा काम है तो     अरे >> करते ही क्यूं हो >> छोड़ क्यूं नहीं देते अरे जान बुझ कर गलत काम ) मत करो छोड़ दो वो सब जिस से कोई लाभ नहीं /  
अगर रत्न धारण करोगे तो वो भी तो देव देवी के रतन हैं   उनकी प्रतिष्ठा  भी तो देव देवी के मंत्रून से ही होती है
वो सब भी पुजनिये  हैं
अतः  बुरी भावनाओं को छोड़ कर संसार की व्याधियों  को दूर करने के लिए शिव प्रशाद रूप में रुद्राक्ष धारण करे 
फ्री जानकारी के लिए  फ़ोन पर संपर्क कर सकते हैं
कल्याण हो
वास्तुअचार्य 
अवतार सिंह 
९०१३२०३०४०





 

vaastu

नियमों के पालन करने से /
शेष फिर कभी >>>>>>>>>>
वास्तु अवतार 
९०१३२०३०४०





HOROSCOPE TEVA KUNDLI

नियमों के पालन करने से /
शेष फिर कभी >>>>>>>>>>
वास्तु अवतार 
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VAASTU ASTROLOGY

ASTROLOGY

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VAASTU ACHARYA
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गुरुवार, 14 अक्टूबर 2010

प्राथना

सोमवार, ४ अक्तूबर २०१०

prathna

हे ईश्वर
यह विडंबना ही है की मेरी जीविका दूसरों की समस्याओं पर
निर्भर है
यह भी मेरा सोभाग्य है की आपने उन समस्याओं का समाधान करने के लिए
उत्तम अवसर दिया

ओर
यह उतरदायित्व पूरनकरने की तोफिक भी मुझे वरदान में दी
हे प्रभु
मुझ पर अपना किर्पाभरा हाथ मेरे सरपर सदेव रखना जिससे में इस कार्य को पूरण निष्ठाके साथ पूरण
कर सकूं ओर मेरी वाणी कभी भी असत्य न हो


वास्तु आचार्य
९०१३ २०३०४०

भविष्य

Tuesday, August 24, 2010

भविष्य

ye din bhi n rahenge

वास्तु कुछ ओर भी

Tuesday, August 24, 2010

वास्तु ?

SUB KUCHH TO VAASTU NIYAMO SE KARNA CHAHIE THA
HUA KYA? SUB KUCHH TO BAN KAR TEYAAR HO GAYA.
KUCHH PARESHAANIYAAN HAEN ?
KYA PURANA GHAR TOD KAR BANAAENGE?
KIRAAE PAR REHTE HAEN?
KAHAAN DHOOND RAHE HAEN VAASTU KE ADHAAR PARR
BANA AASHIYANA.
AGAR SUB NAZAR AA BHI GAYA TO US KA MALIK DEGA HI KYOON KIRAAE PAR
WO TO SUKHI HI HAE YAANI WO GHAR BHI KAHEEN VAASTU DOSH MAEN HI HOGA?
PHIR KYA KAREN?
AAO KAREAN PRATHNA PRABHU CHARNO MAEN EK BAAR DIL AUR AASTHA SE
KESE>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>.
????????????????????????????
AAO KAREAN VICHAAR

कबाड़

KYOON KARTE HAEN MOH
APNE KBAAD SE
KAB KAAM AAEGA WO SAB
TOOTA PURANA FURNITURE
AUR SAALOON PURANE KAPDE
HATAAO SUB ....AUR
PAO KHUSHIYAAN>>>>>>>>>>>>>>>>>>.

पूजा केसे करें?

aaj ki mehgaai ke ander kese karen
pooja?

asaan hae.
Aap jo bhi chahte haen prabhu ke charno maen arpit karna
karo arpit MAANSIK POOJA SE.

गाए का घी

kahaan se milega poojan ke liea
shudh ghe
kya aap tv news dekhte haen?
to kya karen?
Til ka tel hi achha hoga.

धन prapti

maa lakshmi ji ke paas prati din ek deepak jlaaen aur
prathna kare dhan prapti ke lie samey 6:00pm

धन प्राप्ति केसे हो

chawal til aur khir se karo hawan vishesh dhan prapti mantroon ke saath
ichha avashy poori hogi.

रोग और kaaran

bimari aur usse mukti vichar
aao ek baar phir vichar karen
kyoon bimar hote haen hum

वास्तु प्रशन ही प्रशन

वास्तु प्रशन ही प्रशन

अगर कोई भू खंड आग्नेय नेत्रय्त्य वाव्या ओर इशान के मार्ग की ओर बढ जाए तो वहां पर केसे घर का निर्माण वास्तु नियमो के अनुसार किया जाएगा
घर का इशान कट जाने पर भी कई परिवार सुखी संपन देखे जाते हैं क्या कारन हो सकता है
क्या वायवे इशान आग्नेय घटाए जा सकते हैं
घर की किन दिशाओं में अधिक खुला स्थान गार्डेन हो सकता है ओर क्यों
घर की किन दिशाओं में अधिक खाली स्थान नहीं होना चाहिए ओर क्यों
अपने भूखंड ओर घर में किन दिशाओं में हम विस्तार कर सकते हैं
किन किन दिशाओं में हम विस्तार नहीं कर सकते
वास्तु नियमों के अनुसार निर्माण कार्य कब ओर केसे करना चाहिए {महूरत विचार }
घर में भारी सामान को किस दिवार के साथ रखना चाहिए ओर किस दिवार के पास नहीं
घर बनाते समय मटेरिअल किस दिशा में रखना चाहिए
घर की कोण कोण दिशा ऊंची ओर नीची होनी चाहिए कारन भी लिखें
घर में { एल } आकर का हाल बनाने के लिए कोण सी दिशा में विस्तार करेंगे कारन कहें
पहले घर का निर्माण करना चाहिए की चार दिवारी का
शेर मुखी भूखंड पर निर्माण करते समय भूखंड को धन दायक ओर पुष्टि वर्धक केसे बनाएंगे
चारदीवारी या परकोटा किसे कहते हैं
क्या फूलों की बेल मुख्य द्वार पर लगाई जा सकती है
अगर घर के उत्तर पूर्व ओर इशान में अन्य कोई निर्माण हो चूका हो ओर आप का भूखंड केवल पच्छिम दक्षिण
दिशा का हो तो क्या चारदीवारी की आवश्यकता होगी
किन दिशाओं के निर्माण शुभ फल दायक हो सकते हैं
देखा जाता है की एक ही चारदीवारी में कुछ अधिक घरो का निर्माण किया जाता है क्या यह शुभ होगा
एक ही चारदीवारी के अंदर नेत्रय दिशा में उपग्रह केसे ओर कहाँ बना सकते हैं चित्र द्वारा बताएं
चारदीवारी में गेट लगाने का नियम लिखें । किन किन देवताओं के स्थान पर द्वार योजना उचित रहेगी
भू खंड में जल स्थान कहाँ पर होना चाहिए
भू खंड में अग्नि स्थान कहां होगा
भू खंड का पृथ्वी तत्व किस दिशा में होगा ओर उस दिशा का देवता कोन है
आग्नेय स्थान पर जल का प्रभाव कहें
दक्षिण दिशा में जल का क्या प्रभाव होगा
घर के मध्य स्थान का नाम ओर देवता का नाम लिखें
नक्षा बना कर जल अग्नि स्थान को चिन्ह करें
भू खंड में कुआँ बनाने का शुभ महूरत कोन सा होगा {पंचांग वर्णन करें }
घर की किन किन दिशाओं में कुआँ बावली खड्डा करना वर्जित है
छत पर ओवर हेड टंक किस दिशा में होना उचित नहीं
अगर इशान में टंक बन चूका हो तो क्या सुझाव कहेंगे
घर में ओवर हेड टंक इशान में क्यों नहीं होना चहिए
पुराने स्नान घर ओर आधुनिक बाथ रूम में क्या अंतर है
घर में स्नान घर की उचित जगह का वर्णन करो
इशान दिशा के कमरे के साथ क्या बाथ रूम बना सकते हैं
बाथरूम में गीजर कहां स्थपित किया जा सकता है
टोइलेट किस दिशा में स्थान प्राप्त करेगा
सेप्टिक टंक किस दिशा में बनाना चाहिए
टोइलेट में बेसिन केसे लगाया जाए
घर में किन दिशाओं के कमरे में लेट्रिन बाथ बनाए जा सकते हैं ओर किन दिशाओं में नहीं कारन लिखें
वेध किसे कहते हैं
वेध कितने प्रकार के होते हैं {कुल ५४ वेध होते हैं }
पेज ६७
प्राचीन शास्त्र कारों ने ८ वेध का वर्णन किया है उन का उल्लेख करें
क्या वास्तु में द्वार योजना पर भी कहा गया है ? उल्लेख करें
द्वार योजना पर निबंध लिखें
मार्ग वेध क्या होता है
चारदीवारी में पेड़ कहां नहीं लगाए जा सकते
छाया वेध क्या होता है
वीथी प्रहार ओर वीथी प्रसार किसे कहते हैं । अछि वीथी पर प्रकाश डालें
घर में कितनी खिड़की रोशन दान ओर द्वार होने शुभता को प्राप्त कराते हैं
मुख्य द्वार से क्या तात्पर्य है
कोन से द्वार अशुभता देते हैं
अभी ओर भी >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>

वास्तु आचार्य
९०१३२०३०४०

बुधवार, 13 अक्टूबर 2010

vaastuavtaar: वास्तु विद्या ओर प्रशन ????????????

vaastuavtaar: वास्तु विद्या ओर प्रशन ????????????: "वास्तु क्या है लेख लिखे वास्तु कला कितनी प्राचीन है वास्तु शास्त्र किन ग्रंथों पर आधारित है वास्तु ग्रन्थ के आचार्य कोन २ हैं वास्तु शास्त..."

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

वास्तु विद्या ओर प्रशन ????????????

वास्तु क्या है लेख लिखे
वास्तु कला कितनी प्राचीन है
वास्तु शास्त्र किन ग्रंथों पर आधारित है
वास्तु ग्रन्थ के आचार्य कोन हैं
वास्तु शास्त्र का अध्यन क्यों आवश्यक है
भारतीय वास्तु कला विकृत क्यों हुई
वैदिक वास्तु विज्ञानं कितना प्राचीन है
क्या वास्तु नियम गरीब के झोपड़े पर भी प्रभाव डालता है ओर केसे
क्या किराए के घर पर भी वास्तु परभाव डालता है
बहुत से भवन अधर में ही रह जाते हैं कारन कहें
क्या वास्तु नियम हिन्दू समाज के लिए ही होंगे
क्या बिना तोड़ फोड़ के वास्तु ठीक हो सकता है
कुछ वास्तु नियमो के विपरीत निवास स्थान होने पर भी विपरीत पर्भाव देखने को नहीं मिलते क्या कारन हो सकता है
वास्तु विद्या का भारत में प्रचार किस कारन से देर से हुआ
वास्तु इन दिनों में ही क्यों परचार में आया
वास्तु शास्त्र ओर फेंग शुई जेसे प्राचीन ग्रन्थ के आधार पर आज के आधुनिक समाज में इन नियमो का प्रभाव केसे पड़ सकता है
वास्तु ओर फेग शुई में से कोन सा शास्त्र अधिक प्रभाव दे सकता है
क्या वास्तु ग्रन्थ जादू या अन्धविश्वाश को मानने के लिए प्रेरित करते हैं
वास्तु शास्त्र के नियम से दोष निवारण का फल कितने समय में दिखलाई पड़ सकता है
क्या वास्तु शास्त्र का पर्भाव सारे परिवार पर हो सकता है
क्या वास्तु दोष निवारण का उपाए काम करेगा ही इसका क्या परमान है
क्या घर का फुर्नितुरे बदलने से भाग्य पर उचित अनुचित प्रभाव होता है
क्या दोष निवारण यंत्रू का गलत प्रभाव भी हो सकता है
वास्तु शास्त्र के आधार पर कुछ भवनों का उद्धरण दें
फेंग शुई क्या घर की साज सज्जा बदलने का ही शास्त्र है
क्या रंगों का इस शास्त्र से समभंद है है तो वर्णन करें
भारतीय वास्तु शास्त्र के प्रतीक चिन्ह क्या हैं
चीनी ज्योतिष के आधार पर कौन सी राशी होती हैं
उत्तर : चूहा बैल सिंह खरगोश ड्रेअगन सांप घोडा भेड़ बन्दर मुर्गा कुत्ता ओर सूअर
वास्तु शास्त्र में दिशाओं का क्या महत्व है
सूर्य की किरणों का क्या पर्भाव होता है
चुम्बकीय किरण क्या होती हैं इनसे क्या लाभ होता है
भूमि परीक्षा किस पारकर से संभव है
भूमि कितने पारकर की होती है
ब्राह्मणी,शुद्र,वेश्या ओर क्षत्रिय भूमि के क्या गुण भेड़ होते हैं
भूमि परीक्षा के कोन से मापदंड होते हैं
भूमि खनन के समय प्राप्ति सामग्री के आधार पर भू परीक्षण का विवरण दें
नया भू खंड प्राप्त करते समय क्या क्या देखना चाहिए
भूमि की कौन सी आकृति स्थल वास्तु के आधार पर शुभ होगा
ईशान अशुद्ध केसे हो सकता है ओर उसका क्या परिणाम होगा

अभी ओर भी प्रशन होंगे >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>

वास्तु अवतार

९०१३ २० ३० ४०

वास्तु विषय अनुकर्मनिका

विषय परवेश
वास्तु क्या है
वास्तु में दिशाओ का महत्व
वास्तु के कटे स्थान का पर्भाव
निर्माण कब ओर केसे
चारदीवारी
बहुमंजिला भवन की द्वार योजना
जल स्थान
छत पर जल स्थान
१० स्नान घर
११ टोइलेट
१२ वेध
१३ वीथी प्रहार ओर प्रसार
१४ द्वार खिड़की ओर रोशनदान
१५ बरामदा
१६ बालकोनी
१७ सीडिया
१८ शयनकक्ष
१९ पूजा घर
२० तुलसी
२१ रसोईघर
२२ गेस्चुल्हा
२३ घर की तिजोरी
२४ फेंगशुई
२५ पिरामिड
२६ विविध विषय ///////////////////


वास्तुअचार्य
अवतार सिंह
९०१३२०३०४०



सफल दांपत्य जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र

सफल दांपत्य जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र

सोमवार, 11 अक्टूबर 2010

प्रिय पाठक

ज्योतिष के गंभीर विषय को अति सरल ओर सत्य रूप में जानने के लिएया कुछ अनुभव आपके सामने लिख रहा हूँ
प्रत्येक मानव के जीवन पर नव ग्रहों का दो तरह से प्रभाव से असर होता है

पहला : जन्मसमय अनुसार कुंडली के अन्दर नवग्रह जिस २ स्थान पर अच्छा या बुरा सवभाव लेकर बेठाहो उसका फल के साथ हमेशा जुड़ारहता है ओर दूसरी ओर नवग्रहों द्वारा पंचांग गोचर गति के अनुसार राशी परिवर्तन करते रहने के कारन से हर एक लगनवालोपर अलग रूप से अच्छा बुरा पर्भाव होता है
अतः हर व्यक्ति को अपने जीवन की पूरी जानकारी के लिए पहले तो अपनी कुंडली के अधर पर ग्रहों का फलादेश जानलेना चाहिएओर दूसरा पंचांग के अधार पर जो जो गृह जिन जिन राशी पर चलता हो उसका फलादेश जानना चाहिए
अतः इस प्रकार फलादेश जानने से जीवन का नक्शा भूतभविष्य ओर वर्तमान का ज्ञान होता रहेगा

विशेष ::: जन्म कुंडली के अन्दर स्थापित नवग्रह में जो गृह २७ अंश से ऊपर या ३ अंश से निचे होगा या सूर्य से अस्त होगा अपनी शक्ति के अनुसार पूरा फल नहीं देगा

शेषफिर
वास्तुअचार्य
० ९०१३ २० ३० ४०

शनिवार, 9 अक्टूबर 2010

प्राथना

prathna

हे ईश्वर
यह विडंबना ही है की मेरी जीविका दूसरों की समस्याओं पर
निर्भर है
यह भी मेरा सोभाग्य है की आपने उन समस्याओं का समाधान करने के लिए
उत्तम अवसर दिया
ओर
यह उतरदायित्व पूरनकरने की तोफिक भी मुझे वरदान में दी
हे प्रभु
मुझ पर अपना किर्पाभरा हाथ मेरे सरपर सदेव रखना जिससे में इस कार्य को पूरण निष्ठाके साथ पूरण
कर सकूं ओर मेरी वाणी कभी भी असत्य न हो

वास्तु आचार्य
९०१३ २०३०४०

सोमवार, 4 अक्टूबर 2010

prathna

हे ईश्वर
यह विडंबना ही है की मेरी जीविका दूसरों की समस्याओं पर
निर्भर है
यह भी मेरा सोभाग्य है की आपने उन समस्याओं का समाधान करने के लिए
उत्तम अवसर दिया
ओर
यह उतरदायित्व पूरनकरने की तोफिक भी मुझे वरदान में दी
हे प्रभु
मुझ पर अपना किर्पाभरा हाथ मेरे सरपर सदेव रखना जिससे में इस कार्य को पूरण निष्ठाके साथ पूरण
कर सकूं ओर मेरी वाणी कभी भी असत्य न हो

वास्तु आचार्य
९०१३ २०३०४०

रविवार, 26 सितंबर 2010

शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

MIRRORS IN THE BEDROOM CAUSE SO MANY PROBLEMS.
MIRROR POSSESS A SPECIAL FORM OF ENERGY WHICH CAN EITHER BE VERY GOOD OR VERY BAD.
THE ONE PLACE WHERE MIRROS CAN DO A GREAT DEAL OF HARM IS IN THE BEDROOM.
MIRRORS R A MAJOR TABOO IN THE BED ROOM.
MIRRORS CAUSE HAVOC IN THE COUPLE s MARRIAGE AND LOVE LIFE
MIRRORS R OFTEN RESPONSIBLE 4 THE ENTRANCE OF THIRD PARTIES IN TO AN OTHERWISE GOOD RELATIONSHIP.
IF U MUST HAVE A MIRROR IN YOUR BEDROOM.
KEEP IT CLOSE.. AND COVERED DURING SLEEP.
ONE SHOULD BE VERY CAREFUL ABOUT MIRRORS THAT DIRECTLY FACE THE BED..
ALERT::::>>>> NO MIRROR ON THE CEILING .

VAASTU ACHARYA
0 90 13 20 30 40

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