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सोमवार, 26 दिसंबर 2011

viniti

प्राथना

prathna

हे ईश्वर
यह विडंबना ही है की मेरी जीविका दूसरों की समस्याओं पर
निर्भर है और
यह  मेरा सोभाग्य है की आपने उन समस्याओं का समाधान करने के लिए
उत्तम अवसर दिया................

यह उतरदायित्व पूरा करने की तोफीक भी मुझे वरदान में दी
हे  ईश्वर

  मेरे सर पर  अपना  कृपा भरा हाथ सदेव रखना, जिससे में इस कार्य को पूरण निष्ठाके साथ पूरण
कर सकूं ओर मेरी वाणी कभी भी असत्य न हो

वास्तु आचार्य 
अवतार सिंह 
09013203040

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

उज्जैन


उज्जैन विशव का नाभि स्थल कहा जाता है
, यहीं से कर्क और मध्य रेखा गुजरती हैं , जिस जातक की कुंडली में मंगल दोष कष्ट
दे रहा हो उसके लिए इसी स्थान पर मंगल दोष निवारणकिया जाना ज्यादा शुभ कहा गया है

 वास्तु आचार्य
अवतार सिंह
 

सोमवार, 15 अगस्त 2011

रवि सूर्य कुछ कह रहे हैं

As we all know that we have 26 alphabets in English, as given below?

A B C D E F G H I J K L M N O P Q R
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18
S T U V W X Y Z
19 20 21 22 23 24 25 26

With each alphabet getting a number, in chronological order, as above, study the following, and bring down the total to a single digit and see the result yourself

Hindu
S h r e e K r i s h n a
19+8+18+5+5+11+18+9+19+8+14+1=​135=9

M u s l i m
M o h a m m e d
13+15+8+1+13+13+5+4=72=9

Jain
M a h a v i r
13+1+8+1+22+9+18=72=9

Sikh
G u r u N a n a k
7+21+18+21+14+1+14+1+11=108=9

Parsi
Z a r a t h u s t r a
26+1+18+1+20+8+21+19+20+18+1=1​53=9

Buddhist
G a u t a m
7+1+21+20+1+13=63=9

Christian
Esa Messiah
5+19+1+13+5+19+19+9+1+8=99=18=​9
Each one ends with number 9
THAT IS NATURE’S CREATION.
ALMIGHTY is ONE for all HUMANE BEING
BUT YET MAN FIGHTS WITH MAN, ON THIS EARTH
in the name of
RELIGION

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

आरती

आरती ,पूजा का एक विशेष चरण जो की हर प्राथना कार्य के बाद विशेष सामग्री और पदार्थों के साथ की जाती है, आरती के समय तीन बार पुष्प अर्पित किए जाते है
आरती के समय घंटी , नगाड़े का विशेष रूप से पर्योग भी किया जाता है, इस के पीछे भी कई वैज्ञानिक कारन निहित हैं,
आरती के वास्ते पञ्च प्रदीप जलाना आवश्यक है ,आरती कर्पूर व् विषम संख्या की बाटी से की जाती है ,आरती पञ्च प्रकार से की जा सकती है
१ शंख में गंगा जल भर कर ,२ दीप से,३ कर्पूर से ४ पीपल के पत्तो से शरीर के पांचो अंग से..दोनों हाथ और पाँव और मष्तिक .
पञ्च प्राणों की प्रतीक आरती शरीर के पञ्च प्राणों की प्रतीक ही है घी की ज्योति आत्मा जी ज्योति का प्रतीक है.
आरती के लिए सामग्री के रूप में कलश और उसमें विशेष ओषिध सामिग्री भी डाली जाती हैं
कलश का रूप भी एक विशेष आकार का होता है , जिसमें कलश का बीच का खाली स्थान शिव का स्थान होता है , आरती के समय कलश से पूजा करते हुए हम शिव जी से एकाकार हो जाते हैं , समुंदर मंथन के समय भगवन विष्णु जी ने कलश धारण किया था , और सभी देवताओं का वास भी कलश में होता है , क्योंकि जल में देवताओं का वास माना जाता है,
नारियल की शिखाओं में सकारात्मक उर्जा का भण्डार होता है, आरती गाते हुए नारियल की शिखाओं की उर्जा कलश के जल में जाती है , और जल औषध और अमृत मई हो जाता है
कलश में सोना चाँदी या ताम्बा डालना त्याग का प्रतीक होता है, और इस धातु से सात्विक गुणों का समावेश जल में होता है , जल में सुपारी डालने से भी हमारे शरीर की रजोगुण को समाप्त कर देती हैं हमारे शारीर में अछे गुण धारण करने की शक्ति बड़ जाती है
पण की बेल जिसे नाग्बेल भी कहते हैं , यह भूलोक और ब्रह्मलोक को जोड़ने की कड़ी कहा जाता है , देव मूर्ति से उत्तपन सकारात्मक उर्जा पान के डंटल द्वारा प्राप्त की जाती है
और तुलसी दल में वातावरण को शुद्ध करने की उर्जा ले लिए ही तुलसा दल का होना अति आवश्यक मन जाता है.

दीप और हम

उज्जवल भविष्य के लिए कब और कहां दीप जलाने का शुभ फल मिलेगा ... आओ जाने
शिव गौरी जी के मंदिर में जलाएं दीपक और करें प्राथना    शुभ    मंगल मई विवाह के वास्ते और पाएं आशीर्वाद
विष्णु जी और केले का वृक्ष>> शुद्ध घी का दीपक आपको दे सकता है स्वास्थ्य और सुन्दर शरीर
बाधा दूर करने के वास्ते गणेश जी की बुधवार और गुरुवार को शुद्ध गाए के घी से पूजा करने से कामनाएं पूरी होती देखी जाती हैं
माँ दुर्गा जी के मंदिर में करो दीप माला और पाओ आशीर्वाद, विशेषकर शुकर्वार को
शनिवार का दिन हो और हनुमान जी को व् शनिदेव को करें प्रसन दीपक जला कर
वास्तु आचार्य
अवतार सिंह
9013203040

शनिवार, 6 अगस्त 2011

मित्र को सन्देश

शनि में चन्द्रमा , या चन्द्र में शनि का दशा काल आर्थिक रूप में कष्ट देता है

गुरुवार, 21 जुलाई 2011

ज्योतिष विज्ञान ओर वास्तु एक दुसरे के पूरक हैं
वास्तु केवल विभिन कार्यों के वास्ते कम्र्रों ,व् भवन की जियामितीय व्यवस्था नहीं है
भवन के निर्माण ग्रह परवेश आदि महुर्तों का किसी भी कीमत पर त्याग नहीं करना चाहिए
भवन का वास्तु अनुकूल पेड़ पोधों के बिना अधुरा ही होगा
वास्तु आचार्य
अवतार सिंह
९०१३२०३०४०

बुधवार, 20 जुलाई 2011

ज्योतिषी जब भी ज्योतिष विद्या का सहारा लेकर यजमान को भयभीत करते हैं

ज्योतिषी जब भी ज्योतिष विद्या का सहारा लेकर यजमान को भयभीत करते हैं
ओर नकारात्मक विचारों का सहारा लेकर कर्मकांड पूजा कार्य करते या करवाते हैं
उनका वेदों से शायद कोई भी सम्बन्ध नहीं होता ओर न ही धरम से।
अत वर्तमान ज्योतिष विद्या पर एक बार फिर गहन विचार करने की आवश्यकता है
ज्योतिष अदवेत का विज्ञानं है
इसे सही ओर सकारात्मक दिशा में विकसित किए जाने की ज़रूरत है।
वास्तु आचार्य
अवतार सिंह
९०१३२०३०४०

बुधवार, 6 जुलाई 2011

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

गज जेहि द्वारे सूंड  उठावे  , सकल शगुन अस बात जतावे

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

ईशान पूजा , नेरित भरी , अग्नि अगन जरावे 
वायु खुल्ला , नाभि खाली , उह घर राम रखावे

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

जे कोई पूजे तीन गणेश , उके घर चिंता परवेश

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

जा के घर बीचे मा  खम्बा ,वई  के  का  राखे  जगदम्बा

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

जेहि भुइं  पर  अशोक वृख बासा   ,  शोक रहित उई भवन सुवासा II

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

जेहिं भुइं  पर  अशोक वृख बसा   ,  शोक रहित उई भवन सुवासा II

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

बीचे कूप  न  आवे  धूप 
होवे रंक जो रहे  जो  भूप II

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

बड़ो द्वार भावे 
आफत बुलावे II

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें


 सिहं मुखी जो रहने जावे , तन धन आपन सकल गवावे

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

जा के उत्तर धोबी होवे I
 ताहि भुवन को मालिक रोवे II

लोक अंचल में कही वास्तु के लिए कुछ कहावतें

जा के पूरब पीपल होवे 
सो लक्ष्मी पे लक्ष्मी खोवे II

बुधवार, 22 जून 2011

मुबारक हो मुबारक >>>>>>> आ रहा है दुनिया का सात अरबवां बच्चा

मुबारक हो 31 अक्टूबर को आ रहा है दुनिया का सात अरबवां बच्चा

मुबारक हो मुबारक  >>>>>>> आ रहा है दुनिया का सात अरबवां बच्चा  

दुनिया की आबादी सात अरब होने वाली है।
31 अक्टूबर को सात अरबवां बच्चा पैदा होगा। 
  जानकारों का कहना है कि यह बच्चा एशिया में पैदा हो सकता है।  
एशिया में इस बच्चे के पैदा होने की संभावना ज्यादा इसलिए है क्योंकि यहाँ सूरज पहले उगता है।
यानी तारीख यहाँ  पहले बदल जाएगी।
  यह तो   नहीं बताया जा सकता कि वह सात  अरबवां बच्चा या बच्ची  लेकिन होना तो >>>    है ही 
एक बार फिर मुबारक 
वाह वाह वाह .........
खेत काट काट कर मंजिल पर मंजिल  बनाते जाओ आने वालों के रहने के लिए , खाने को अनाज तो भगवान सब को देता ही है >> है  न ?

मुबारक हो 31 अक्टूबर को आ रहा है दुनिया का सात अरबवां बच्चा



हर दिन 2 लाख 28 हजार 155 लोग दुनिया में पैदा होते हैं।
 हर सेंकड दुनिया की जनसंख्या बढ़ रही है
रोक सको तो रोक लो , या अनाज पैदा करो { कर नहीं सकते }   और    साधन इकट्टे करो { कर नहीं सकते }  कर सकते हो ????

वास्तु आचार्य

मुबारक हो 31 अक्टूबर को आ रहा है दुनिया का सात अरबवां बच्चा

मुबारक हो मुबारक  >>>>>>> आ रहा है दुनिया का सात अरबवां बच्चा  

दुनिया की आबादी सात अरब होने वाली है।
31 अक्टूबर को सात अरबवां बच्चा पैदा होगा। 
  जानकारों का कहना है कि यह बच्चा एशिया में पैदा हो सकता है।  
एशिया में इस बच्चे के पैदा होने की संभावना ज्यादा इसलिए है क्योंकि यहाँ सूरज पहले उगता है।
यानी तारीख यहाँ  पहले बदल जाएगी।
  यह तो   नहीं बताया जा सकता कि वह सात  अरबवां बच्चा या बच्ची  लेकिन होना तो >>>    है ही 
एक बार फिर मुबारक 
वाह वाह वाह .........
खेत काट काट कर मंजिल पर मंजिल  बनाते जाओ आने वालों के रहने के लिए , खाने को अनाज तो भगवान सब को देता ही है >> है  न ?
 



'आदर्श समाज' ?????????

ओशो कहते हैं, मनुष्य-जाति जिस कुरूपता और अपंगता में फंसी है, उसके मूलभूत कारण शिक्षा में ही छिपे हैं।
जीवन के वृक्ष पर कड़वे और विषाक्त फल देखकर क्या गलत बीजों के बोए जाने का स्मरण नहीं आता है?
बीज गलत नहीं तो वृक्ष पर गलत फल कैसे आ सकते हैं?
वृक्ष का विषाक्त फलों से भरा होना बीज में प्रच्छन्न विष के अतिरिक्त और किस बात की खबर है?
मनुष्य गलत है तो निश्चय ही शिक्षा सम्यक नहीं है

क्या कुछ बदल सकते हैं हम अपने को अपने समाज को ?
शायद नहीं  बहुत देर हो चुकी है

'आदर्श समाज' ?????????


एक अरसे से शिक्षा में ज्ञान, अहिंसा, उचित आचरण की शिक्षा दी जाती रही है।
माना जाता है  कि शिक्षा से 'आदर्श समाज' का निर्माण होता है ।
पिछले 25-30 वर्षों में विद्या ,जानकारी और ज्ञान का विस्फोट होता देखा जा रहा  है और हर वर्ग में शिक्षा का स्तर बढ़ा है। लेकिन, क्या हम 'आदर्श समाज' का निर्माण कर पाए हैं?
शायद  नहीं  , कुछ अपवाद छोड़ कर, 
क्या अब भी हम संभल सकते हैं >>>>नहीं 
फिर भी लगे रहो , लेकिन कुछ बदलना पड़ेगा
 

रविवार, 12 जून 2011

totke

पंडित जी के टोटके

प्रारब्ध की बात छोड़ दें, तो भी परमेश्वर द्वारा कुछ वस्तुओं में धनप्राप्ति के गुणधर्म किये गए हैं, यह बात निर्विवाद है। जिस प्रकार यज्ञादिक कर्मों द्वारा स्वर्ग की प्राप्ति होती है, बरसात होती है या देश पर आये महान संकट दूर होते हैं, उसी प्रकार कुछ ख़ास साधनाएं और टोटके किये जाएं, तो मनुष्य को धन की प्राप्ति अवश्य होती है और घर में सुख-सम्रद्धि आती है। ये टोटके बिलकुल सरल हैं और इसके लिए जरूरी चीजें भी, सहज ही में उपलब्ध की जा सकती हैं। इसमें आपको पूर्ण श्रद्धा अवश्य होनी चाहिए। तो आइये करें ये लाभदायक व कुछ ख़ास उपाय।
1.      भर लें अपने भण्डार गृह
जिस स्थान पर होली जलाई जाती रही हो, वहां पर होली जलने से एक दिन पहले की रात्री में एक मटकी में गाय का घी, तिल का तेल, गेहूं और ज्वार तथा एक ताम्बे का पैसा रखकर मटकी का मुंह बंद करके गाड़ आएं। रात्रि में जब होली जल जाए, तब दूसरे दिन सुबह उसे उखाड़ लाएं। फिर इन सब वस्तुओं को पोटली में बांधकर जिस वास्तु में रख दिया जाएगा, वह वास्तु व्यय करने पर भी उसमें निरंतर वृद्धि होती रहेगी, और आपके भंडार भरे हुए रहेंगे।

2.     अगर आप चाहते हैं की आपके प्रतिष्ठान में बिक्री ज्यादा हो तो यह करें
आप अपने व्यापार में अधिक पैसा प्राप्त करना चाहते हैं और चाहते हैं की आपके व्यापार की बिक्री बढ़ जाए तो आप वट वृक्ष की लता को शनिवार के दिन जाकर निमंत्रण दे आएं। (वृक्ष की जड़ के पास एक पान, सुपारी और एक पैसा रख आएं) रविवार के दिन प्रातः काल जाकर उसकी एक जटा तोड़ लाएं, पीछे मुड़कर न देखें। उस जटा को घर लाकर गुग्गल की धूनी दें तथा 101 बार इस मंत्र का जप करें-
ॐ नमो चण्ड अलसुर स्वाहा।

3.    छोटे बच्चों को नजर लगने पर-
अगर आप चाहते हैं की छोटे बच्चों को नजर न लगे इसके लिए हाथ में चुटकी भर रक्षा लेकर ब्रहस्पतिवार के दिन 'ॐ चैतन्य गोरखनाथ नमः मंत्र का 108 बार जप करें। फिर इसे छोटी-सी पुडिया में डालकर काले रेशमी धागे से बच्चे के गले में बाँधने पर बुरी नजर नहीं लगती।

4.    अपने व्यापार में करें मनोवांछित उन्नति-
अगर आप अपने व्यापार में मनोवांछित उन्नति करना चाहते हैं तो सोमवार को प्रातः नवनिर्मित अंगूठी को गंगाजल में धोकर गाय के दूध में डुबो दें, उसमें थोड़ी-सी शक्कर, तुलसी के पत्ते और कोई भी सफ़ेद फूल डाल दें। इसके पश्चात स्नान ध्यान से निवृत्त होकर अंगूठी को पहन लें। ऐसा करने से व्यापार में मनोवांछित उन्नति प्राप्त होगी।

5.    कन्या के विवाह में विलम्ब होने पर-
अगर आपकी कन्या के विवाह में विलम्ब हो रहा हो या कन्या के लिए योग्य वर की तलाश पूरी नहीं हो रही हो तो किसी भी गुरूवार के दिन प्रातःकाल नहा धोकर बेसन के लड्डू स्वयं बनाएं। उनकी गिनती 109 होनी चाहिए। फिर पीले रंग की टोकरी में पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उन लड्डूओं को उसमें रख दें तथा अपनी श्रद्धानुसार कुछ दक्षिणा रख दें। पास के किसी शिव मंदिर में जाकर विवाह हेतु प्रार्थना कर घर आ जाएं।

6.    आपके ज्यादातर कार्य असफल हो रहे हैं तो यह करें-
आप चाहते हैं की आपके द्वारा किये गए कार्य सफल हो लेकिन कार्य के प्रारम्भ होते ही उसमें विध्न आ जाते हैं और वह असफल हो जाते हैं इसके लिए आप यह करें: प्रातःकाल कच्चा सूत लेकर सूर्य के सामने मुंह करके खड़े हो जाएं। फिर सूर्य देव को नमस्कार करके 'ॐ हीं घ्रणि सूर्य  आदित्य श्रीम' मंत्र बोलते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाएं। जल में रोली, चावल, चीनी तथा लाल पुष्प दाल लें। इसके पश्चात कच्चे सूत को सूर्य देव की तरफ करते हुए गणेशजी का स्मरण करते हुए सात गाँठ लगाएं। इसके पश्चात इस सूत को किसी खोल में रखकर अपनी कमीज की जेब में रख लें, आपके बिगड़े कार्य बनाने लगेंगे।

7.    गर्भ धारण करने के लिए-
अगर आपको किसी कारणवश गर्भ धारण नहीं हो रहा हो तो मंगलवार के दिन कुम्हार के घर आएं और उसमें प्रार्थना कर मिट्टी के बर्तन वाला डोरा ले आएं। उसे किसी गिलास में जल भरकर दाल दें। कुछ समय पश्चात डोरे को निकाल लें और वह पानी पति-पत्नी दोनों पी लें। यह क्रिया केवल मंगलवार को ही करनी है अगर संभव हो तो उस दिन पति-पत्नी अवश्य ही रमण करें। गर्भ की स्थिति बनते ही उस डोरे को हनुमानजी के चरणों में रख दें।

8.    अपने घर-गृहस्थी को बनाएं सुखी-
अक्सर हम गृहस्थ जीवन में देखते हैं तो गृहस्थ का सामान टूट-फूट जाता है या सामान चोरी हो जाता है। जो भी आता है असमय ही ख़त्म हो जाता है। रसोई में बरकत नहीं रहती है तो ऐसी स्त्रियाँ भोजन बनाने के बाद शेष अग्नि को न बुझाएं और जब सब जलकर राख हो जाए तो राख को गोबर में मिलाकर रसोई को लीप दें। फर्श हो तो उस राख को पानी में घोलकर उसी पानी से फर्श डालें। यह क्रिया कई बार करें। घर-गृहस्थी का छोटा-मोटा सामान, गिलास, कटोरी, चम्मच आदि सदैव बने रहेंगे।

9.    इच्छा के विरूद्ध कार्य करना पड़ रहा हो तो-
अगर आपको किसी कारणवश कोइ कार्य अपनी इच्छा के विपरीत करना पड़ रहा हो तो आप कपूर और एक फूल वाली लौंग एक साथ जलाकर दो-तीन दिन में थोड़ी-थोड़ी खा लें। आपकी इच्छा के विपरीत कार्य होना बंद हो जाएगा।
 
10.    दाम्पत्य जीवन से झगड़े दूर करें ऐसे-
अगर आपका दाम्पत्य जीवन अशांत है तो आप रात्री में शय न करते समय पत्नी अपने पलंग पर देशी कपूर तथा पति के पलंग पर कामिया सिन्दूर रखें. प्रातः सूर्यदे के समय पति देशी कपूर को जला दें और पत्नी सिन्दूर को भवन में छिटका दें। इस टोटके से कुछ ही दिनों में कलह समाप्त हो जाती है।

11.    बेरोजगारी दूर करने हेतु-
अगर आपको नौकरी या काम नहीं मिल रहा है और आप मारे-मारे फिर रहे हैं तो एक दागरहित बड़ा नीबूं लें और चौराहे पर बारह बजे से पहले जाकर उसके चार हिस्से कर लें और चारों दिशाओं में दूर-दूर फेंक दें। फलस्वरूप बेरोजगारी की समस्या समाप्त हो जाएगी।

12.    भाग्योदय करने के लिए करें यह उपाय-
अपने सोए भाग्य को जगाने के लिए आप प्रात सुबह उठकर जो भी स्वर चल रहा हो, वही हाथ देखकर तीन बार चूमें, तत्पश्चात वही पांव धरती पर रखें और वही कदम आगे बाधाएं। ऐसा नित्य-प्रतिदिन करने से निश्चित रूप से भाग्योदय होगा।

13.    त्वचा रोग होने पर यह करें-
त्वचा संबंधी रोग केतु के दुष्प्रभाव से बढ़ते हैं। यदि त्वचा संबंधी घाव ठीक न हो रहा हो तो सायंकाल मिट्टी के नए पात्र में पानी रखकर उसमें सोने की अंगूठी या एनी कोइ आभूषण दाल दें। कुछ देर बाद उसी पानी से घाव को धोने के बाद अंगूठी निकालकर रख लें तथा पाने किसी चौराहे पर फेंक आएं। ऐसा तीन दिन करें तो रोग शीघ्र ठीक हो जाएगा।

14.    मंदी से छुटकारा पाएं ऐसे-
अगर आपके व्यापार में मंदी आ गयी है या नौकरी में मंदी आ गयी है तो यह करें। किसी साफ़ शीशी में सरसों का तेल भरकर उस शीशी को किसी तालाब या बहती नदी के जल में डाल दें। शीघ्र ही मंदी का असर जाता रहेगा और आपके व्यापार में जान आ जाएगी।

15.    भय को दूर करें ऐसे-
अगर आपको बिना कारण भय रहता हो या सांप-बिच्छू या वन्य पशुओं का भय रहता हो तो यह करें : बांस की जड़ जलाकर उसे कान पर धारण करने से भय मिट जाता है। निर्गुन्डी की जड़ अथवा मोर पंख घर में रख देने से सर्प कभी भी घर में प्रवेश नहीं करता। रवि-पुष्य योग में प्राप्त सफ़ेद चादर की जड़ लाकर दाईं भुजा पर बाँधने से वन्य पशुओं का भय नहीं रहता है साथ ही अग्नि भय से भी छुटकारा मिल जाता है। केवड़े की जड़ कान पर धारण करने से शत्रु भय मिट जाता है।

16.    अगर आपके परिवार में कोई रोगग्रस्त हो तो यह करें.
अगर स्वास्थ्य में सुधर न होता हो तो यह उपाय करें: एक देशी अखंडित पान, गुलाब का फूल और कुछ बताशे रोगी के ऊपर से 31 बार उतारें तथा अंतोक चौराहे पर रख दें। इसके प्रभाव से रोगी की दशा में शीघ्रता से सुधार होगा।

17.    पारिवारिक सुख-शांति के लिए-
अगर आपके परिवार में अशांति रहती है और सुख-चैन का अभाव है तो प्रतिदिन प्रथम रोगी के चार भाग करें, जिसका एक गाय को, दूसरा काले कुत्ते को, तीसरा कौवे को तथा चौथा टुकड़ा किसी चौराहे पर रखवा दें तो इसके प्रभाव से समस्त दोष समाप्त होकर परिवार की शांति तथा सम्रद्धि बढ़ जाती है।
 
18.    अपनाएं सुखी रहने के कुछ नुस्खे-
ब्रहस्पतिवार या मंगलवार को सात गाँठ हल्दी तथा थोड़ा-सा गुड इसके साथ पीतल का एक टुकड़ा इन सबको मिलाकर पोटली में बांधें तथा ससुराल की दिशा में फेंक दें तो वहां हर प्रकार से शांति व सुख रहता है।
कन्या अपनी ससुराल में रहते हुए यह करें। मेहँदी तथा साबुत उरद जिस दिशा में वधु का घर हो, उसी दिशा में फेंकने से वर-वधु में प्रेम बढ़ता है।
किसी विशेष कार्य के लिए घर के निकलते समय एक साबुत नीबू लेकर गाय के गोबर में दबा दें तथा उसके ऊपर थोड़ा-सा कामिया सिन्दूर छिड़क दें तथा कार्य बोलकर चले जाएं तो कार्य निश्चित ही बन जाता है।
 सावन के महीने में जब पहली बरसात हो तो बहते पानी में विवाह करने से दुर्भाग्य दूर हो जाता है।
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19.    अविवाहित व अधिक उम्र की कन्या के विवाह के लिए-
अगर आपकी लडकी अविवाहित है या उसकी उम्र बहुत ज्यादा हो चुकी है इसके कारण विवाह होने में रूकावटें आ रही हो तो इसके लिए एक उपाय है: देवोत्थान एकादशी कच और देवयानी की मिट्टी की मूरतें बनाकर उन मूर्तियों में हल्दी, चावल, आते का घोल लगाकर उनकी पूजा करके उन्हें एक लकड़ी के फट्टे से ढक लेते हैं. फिर उस फट्टे पर कुमारी कन्या को बिठा दिया जाता है तो उसका विवाह हो जाता है।
20    राई से करें दरिद्रता निवारण-
पैसों का कोइ जुगाड़ न बन रहा हो तथा घर में दरिद्रता का वाश हो तो यह करें: एक पानी भरे घड़े में राई के पत्ते डालकर इस जल को अभिमंत्रित करके जिस भी किसी व्यक्ति को स्नान कराया जाएगा उसकी दरिद्रता रोग नष्ट हो जाते हैं।

21.   स्वप्न में भविष्य जानें इस तरह भी-
अगर आप स्वप्न में भविष्य की बात मालूम करना चाहते हैं तो जंगल में जाकर जिस वृक्ष पर अमर बेल हो, उसकी सात परिक्रमा कर अमर बेल्युक्त एक लकड़ी को तोड़ लाएं। फिर उस लकड़ी को धुप देकर जला दें तथा लता को सिरहाने रखकर विचार करते हुए सो जाएं तो स्वप्न में भविष्य की बात मालूम हो जाती है।
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टोने-टोटके - कुछ उपाय
हमारे आसपास पाए जाने वाले विभिन्न पेड़-पौधों के पत्तों, फलों आदि का टोटकों के रूप में उपयोग भी हमारी सुख-समृद्धि की वृद्धि में सहायक हो सकता है। यहां कुछ ऐसे ही सहज और सरल उपायों का उल्लेख प्रस्तुत है, जिन्हें अपना कर पाठकगण लाभ उठा सकते हैं।
विल्व पत्र : अश्विनी नक्षत्र वाले दिन एक रंग वाली गाय के दूध में बेल के पत्ते डालकर वह दूघ निःसंतान स्त्री को पिलाने से उसे संतान की प्राप्ति होती है।
अपामार्ग की जड़ : अश्विनी नक्षत्र में अपामार्ग की जड़ लाकर इसे तावीज में रखकर किसी सभा में जाएं, सभा के लोग वशीभूत होंगे।
नागर बेल का पत्ता : यदि घर में किसी वस्तु की चोरी हो गई हो, तो भरणी नक्षत्र में नागर बेल का पत्ता लाकर उस पर कत्था लगाकर व सुपारी डालकर चोरी वाले स्थान पर रखें, चोरी की गई वस्तु का पला चला जाएगा।
संखाहुली की जड़ : भरणी नक्षत्र में संखाहुली की जड़ लाकर तावीज में पहनें तो विपरीत लिंग वाले प्राणी आपसे प्रभावित होंगे।
आक की जड़ : कोर्ट कचहरी के मामलों में विजय हेतु आर्द्रा नक्षत्र में आक की जड़ लाकर तावीज की तरह गले में बांधें।
दूधी की जड़ : सुख की प्राप्ति के लिए पुनर्वसु नक्षत्र में दूधी की जड़ लाकर शरीर में लगाएं।
शंख पुष्पी : पुष्य नक्षत्र में शंखपुष्पी लाकर चांदी की डिविया में रखकर तिजोरी में रखें, धन की वृद्धि होगी।
बरगद का पत्ता : अश्लेषा नक्षत्र में बरगद का पत्ता लाकर अन्न भंडार में रखें, भंडार भरा रहेगा।
धतूरे की जड़ : अश्लेषा नक्षत्र में धतूरे की जड़ लाकर घर में रखें, घर में सर्प नहीं आएगा और आएगा भी तो कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
बेहड़े का पत्ता : पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में बेहड़े का पत्ता लाकर घर में रखें, घर ऊपरी हवाओं के प्रभाव से मुक्त रहेगा।
नीबू की जड़ : उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में नीबू की जड़ लाकर उसे गाय के दूध में मिलाकर निःसंतान स्त्री को पिलाएं, उसे पुत्र की प्राप्ति होगी।
चंपा की जड़ : हस्त नक्षत्र में चंपा की जड़ लाकर बच्चे के गले में बांधें, बच्चे की प्रेत बाधा तथा नजर दोष से रक्षा होगी।
चमेली की जड़ : अनुराधा नक्षत्र में चमेली की जड़ गले में बांधें, शत्रु भी मित्र हो जाएंगे।
काले एरंड की जड़ : श्रवण नक्षत्र में एरंड की जड़ लाकर निःसंतान स्त्री के गले में बांधें, उसे संतान की प्राप्ति होगी।
तुलसी की जड़ : पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में तुलसी की जड़ लाकर मस्तिष्क पर रखें, अग्निभय से मुक्ति मिलेगी।

टोने-टोटके
छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत्‌
जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस लोकप्रिय
स्तंभ में उपयोगी टोटकों की विधिवत्‌ जानकारी दी जा रही है...

परीक्षा में सफलता हेतु : परीक्षा में सफलता हेतु गणेश रुद्राक्ष धारण करें। बुधवार को गणेश जी के मंदिर में जाकर दर्शन करें और मूंग के लड्डुओं का भोग लगाकर सफलता की प्रार्थना करें।

पदोन्नति हेतु : शुक्ल पक्ष के सोमवार को सिद्ध योग में तीन गोमती चक्र चांदी के तार में एक साथ बांधें और उन्हें हर समय अपने साथ रखें, पदोन्नति के साथ-साथ व्यवसाय में भी लाभ होगा।

मुकदमे में विजय हेतु : पांच गोमती चक्र जेब में रखकर कोर्ट में जाया करें, मुकदमे में निर्णय आपके पक्ष में होगा।

पढ़ाई में एकाग्रता हेतु : शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को इमली के २२ पत्ते ले आएं और उनमें से ११ पत्ते सूर्य देव को ¬ सूर्याय नमः कहते हुए अर्पित करें। शेष ११ पत्तों को अपनी किताबों में रख लें, पढ़ाई में रुचि बढ़ेगी।

कार्य में सफलता के लिए : अमावस्या के दिन पीले कपड़े का त्रिकोना झंडा बना कर विष्णु भगवान के मंदिर के ऊपर लगवा दें, कार्य सिद्ध होगा।

व्यवसाय बाधा से मुक्ति हेतु : यदि कारोबार में हानि हो रही हो अथवा ग्राहकों का आना कम हो गया हो, तो समझें कि किसी ने आपके कारोबार को बांध दिया है। इस बाधा से मुक्ति के लिए दुकान या कारखाने के पूजन स्थल में शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को अमृत सिद्ध या सिद्ध योग में श्री धनदा यंत्र स्थापित करें। फिर नियमित रूप से केवल धूप देकर उनके दर्शन करें, कारोबार में लाभ होने लगेगा।

गृह कलह से मुक्ति हेतु : परिवार में पैसे की वजह से कलह रहता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख में पांच कौड़ियां रखकर उसे चावल से भरी चांदी की कटोरी पर घर में स्थापित करें। यह प्रयोग शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को या दीपावली के अवसर पर करें, लाभ अवश्य होगा।

क्रोध पर नियंत्रण हेतु : यदि घर के किसी व्यक्ति को बात-बात पर गुस्सा आता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख को साफ कर उसमें जल भरकर उसे पिला दें। यदि परिवार में पुरुष सदस्यों के कारण आपस में तनाव रहता हो, तो पूर्णिमा के दिन कदंब वृक्ष की सात अखंड पत्तों वाली डाली लाकर घर में रखें। अगली पूर्णिमा को पुरानी डाली कदंब वृक्ष के पास छोड़ आएं और नई डाली लाकर रखें। यह क्रिया इसी तरह करते रहें, तनाव कम होगा।

मकान खाली कराने हेतु : शनिवार की शाम को भोजपत्र पर लाल चंदन से किरायेदार का नाम लिखकर शहद में डुबो दें। संभव हो, तो यह क्रिया शनिश्चरी अमावस्या को करें। कुछ ही दिनों में किरायेदार घर खाली कर देगा। ध्यान रहे, यह क्रिया करते समय कोई टोके नहीं।

बिक्री बढ़ाने हेतु : ग्यारह गोमती चक्र और तीन लघु नारियलों की यथाविधि पूजा कर उन्हें पीले वस्त्र में बांधकर बुधवार या शुक्रवार को अपने दरवाजे पर लटकाएं तथा हर पूर्णिमा को धूप दीप जलाएं। यह क्रिया निष्ठापूर्वक नियमित रूप से करें, ग्राहकों की संख्या में वृद्धि होगी और बिक्री बढ़ेगी।


वृक्षों को भगवान द्वारा प्रदत्त जीवनी शक्ति मानी गई है। यदि हमें कुछ मिनट वृक्षों से मिलने वाली ऑक्सीजन न मिले तो उसी क्षण विज्ञान की भौतिक उपलब्घियां हमारे लिए कुछ नहीं कर पाएंगी। वृक्षों को हम साक्षात् शिव मान सकते हैं। जिस प्रकार से समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को पीकर सृष्टि की रक्षा की उसी प्रकार पेड़ प्रतिक्षण कॉब्ाüनडाइऑक्साइड रूपी जहर पीकर हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। अपना शरीर देकर हमारे लिए दैनिक उपयोग और भवन निर्माण के लिए फर्नीचर प्रदान करते हैं। आइए जानें वृक्ष वास्तु के नियम-

पौधारोपण उत्तरा,स्वाति,हस्त,रोहिणी एवं मूल नक्षत्रों में करना चाहिए। ऎसा करने पर रोपण निष्फल नहीं होता।
घर के पूर्व में बरगद, पश्चिम में पीपल, उत्तर में पाकड़ और दक्षिण में गूलर का वृक्ष शुभ होता है किंतु ये घर की सीमा में नहीं होना चाहिए।
घर के उत्तर एवं पूर्व क्षेत्र में कम ऊंचाई के पौधे लगाने चाहिए।
घर के दक्षिण एवं पश्चिम क्षेत्र में ऊंचे वृक्ष (नारियल,अ शोकादि) लगाने चाहिए। ये शुभ होते हैं।
जिस घर की सीमा में निगुण्डी का पौधा होता है वहां गृह कलह नहीं होता।
जिस घर में एक बिल्ब का वृक्ष लगा होता है उस घर में लक्ष्मी का वास बतलाया गया है।

जिस व्यक्ति को उत्तम संतान एवं सुख देने वाले पुत्र की कामना हो,उसे पलाश का पेड़ लगाना चाहिए। यह आवासीय घर की सीमा में नहीं होना चाहिए।
घर के द्वार और चौखट में भूलकर भी आम और बबूल की लकड़ी का उपयोग न करें।
कोई भी पौधा घर के मुख्य द्वार के सामने न रोपें। द्वार भेद होता है। इससे बच्चे का स्वास्थ्य खराब रहता है।
तुलसी का पौधा घर की सीमा में शुभ होता है।
बांस का पौधा रोपना अशुभ होता है।
वृक्षों की छाया प्रात: 9 बजे से दोपहर 3 बजे के मध्य भवन की छत पर नहीं पड़नी चाहिए।
जामुन और अमरूद को छोड़कर फलदार वृक्ष भवन की सीमा में नहीं होने चाहिए। इससे बच्चों का स्वास्थ्य खराब होता है।
वृक्ष के पत्ते, डंडे आदि को तोड़ने पर दूध निकलता हो तो इन्हें दूध वाले वृक्ष कहलाते हैं। ऎसे पेड़ स्थापित करने से धन हानि के योग बनते हैं। इनमें महुआ,बरगद,पीपल आदि प्रमुख हैं। केवड़ा,चंपा के पौधों को अपवाद माना गया है।

बैर,पाकड़,बबूल ,गूलर आदि कांटेदार पेड़ घर में दुश्मनी पैदा करते हैं। इनमें जति और गुलाब अपवाद हैं। घर में कैकट्स के पौधे नहीं लगाएं




टोने-टोटके
 छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं. पर उनकी विधिवत जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस लोकप्रिय स्तम्भ में उपयोगी टोटकों की विधिवत जानकारी दी जा रही है।

पांवों को जगाने का टोटका :

    * बहुधा देखा गया है कि प्राणी कहीं देर तक बैठा हो तो हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं। जो अंग सुन्न हो गया हो, उस पर उंगली से 27 का अंक लिख दीजिये, अंग ठीक हो जाएगा।


मृत्यु की आशंका से बचने के उपाय :

    * काले तिल और जौ का आटा तेल में गूंथकर एक मोटी रोटी बनाएं और उसे अच्छी तरह सेंकें। गुड को तेल में मिश्रित करके जिस व्यक्ति की मरने की आशंका हो, उसके सिर पर से 7 बार उतार कर मंगलवार या शनिवार को भैंस को खिला दें।

    * गुड के गुलगुले सवाएं लेकर 7 बार उतार कर मंगलवार या शनिवार व इतवार को चील-कौए को डाल दें, रोगी को तुरंत राहत मिलेगी।

    * महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। द्रोव, शहद और तिल मिश्रित कर शिवजी को अर्पित करें। 'ॐ नमः शिवाय' षडाक्षर मंत्र का जप भी करें, लाभ होगा।


लक्ष्मी प्राप्ति के टोटके :

    * श्रावण के महीने में 108 बिल्व पत्रों पर चन्दन से नमः शिवाय लिखकर इसी मंत्र का जप करते हुए शिवजी को अर्पित करें। 31 दिन तक यह प्रयोग करें, घर में सुख-शांति एवं सम्रद्धि आएगी, रोग, बाधा, मुकदमा आदि में लाभ एवं व्यापार में प्रगति होगी व नया रोजगार मिलेगा। यह एक अचूक प्रयोग है।

    * भगवान् को भोग लगाई हुई थाली अंतिम आदमी के भोजन करने तक ठाकुरजी के सामने रखी रहे तो रसोई बीच में ख़त्म नहीं होती है।


बालक की दीर्घायु के लिये :

    * बालक को जन्म के नाम से मत पुकारें।

    * पांच वर्ष तक बालक को कपडे मांगकर ही पहनाएं।

    * 3 या 5 वर्ष तक सिर के बाल न कटाएं।

    * उसके जन्मदिन पर बालकों को दूध पिलाएं।

    * बच्चे को किसी की गोद में दे दें और यह कहकर प्रचार करें कि यह अमुक व्यक्ति का लड़का है।


घर में सुख-शांति के लिये :

    * मंगलवार को चना और गुड बंदरों को खिलाएं।

    * आठ वर्ष तक के बच्चों को मीठी गोलियां बाँटें।

    * शनिवार को गरीब व भिखारियों को चना और गुड दें अथवा भोजन कराएं।

    * मंगलवार व शनिवार को घर में सुन्दरकाण्ड का पाठ करें या कराएं।


ग्रहों के देवता :

    * सूर्य के देवता विष्णु, चन्द्र के देवता शिव, बुध की देवी दुर्गा, ब्रहस्पति के देवता ब्रह्मा, शुक्र की देवी लक्ष्मी, शनि के देवता शिव, राहु के देवता सर्प और केतु के देवता गणेश। जब भी इन ग्रहों का प्रकोप हो तो इन देवताओं की उपासना करनी चाहिए।
अपना अपना विश्वास है.


व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ के लिए
व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ प्राप्ति नहीं हो रही हो तो किसी भी शनिवार के दिन नीले कपड़े 21 दानें रक्त गुंजा के बांधकर तिजोरी में रख दें। हर रोज धूप, दीप अवश्य दिखाएं। अपने इष्ट देव का ध्यान करें। ऐसा नियमित करने से व्यापार में लाभ मिलेगा और सफलता भी प्राप्त होगी।

धन खर्च रोकने हेतु
यदि परिवार मे अनावश्यक दुघर्टनाओं की वजह से या कोर्ट-कचहरी की वजह से अनावश्यक धन खर्च बढ़ रहा हो तो हर मंगलवार को स्वच्छ लाल वस्त्र सवा किलो लाल मसूर बांधकर पारिवारिक सदस्यों के ऊपर से 11 बार उसार कर कपड़े सहित बहते पानी में प्रवाह कर दें। परेशानियों से छुटकारा मिल जाएगा।

धन प्राप्ति हेतु
संपूर्ण प्रयासों के बावजूद धन की प्राप्ति नहीं होने पर किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को यह उपाय प्रारंभ करें। और लगातार एक साल तक करें। हर रोज नित्यकर्म से निवृत होकर स्नानोपरांत किसी तांबे के पात्र स्वच्छ जल भर के उसमें थोड़ा गंगा जल और शहद मिलाकर सूर्योदय से पूर्व भगवान शिव के शिवलिंग पर ॐ नम: शिवाय का जाप करते हुए चढ़ा दें। लाभ मिलेगा।

बच्चे के बीमार होने पर
यदि आपका बच्चा बीमार है जो भी खाता है उसकी उल्टी कर देता है। एक पान के पत्ते पर एक बूंदी का लड्डू, पांच गुलाब के फूल रखकर बच्चे के ऊपर से सात बार उसार कर चुपचाप किसी मंदिर में रखकर आ जाएं कष्टों से छुटकारा मिल जाएगा।

भूख लगने के लिए
यदि आपको भूख तो है लेकिन खाना मुंह में नहीं जा रहा हो तो प्रात:काल भोजन करते समय अपने भोजन में से एक रोटी निकाल दें उस रोटी को बरगद के पत्ते पर रखकर रोटी के उपर एक लौंग, एक इलायची, एक साबुत सुपारी और थोड़ी सी केसर डाल दे और अपने ऊपर से सात बार उसार कर किसी चौराहे पर चुपचाप रखकर आ जाएं। भूख लगने लगेगी मन प्रसन्न रहेगा।

व्यापार व नौकरी में स्थिरता हेतु
वे लोग जो अपने व्यापार व नौकरी को लेकर हमेशा तनाव में रहते हैं। बार-बार अपना कारोबार बदलते है व बार-बार नौकरी बदलते है तथा कहीं पर भी स्थिर नहीं रह पाते हैं। उन्हें यह प्रयोग जरूर अजमाना चाहिए। 17 इंच लंबा काला रेशमी धागा ले उसे लाल चंदन, कुंकम व केसर को घोलकर उसे रंग लें। तत्पश्चात 'ॐ हं पवननंदनाय स्वाहा' मंत्र का जाप करते हुए आठ गांठ लगा दें। प्रत्येक गांठ पर एक सौ आठ पर इस मंत्र का जाप करें। तत्पश्चात इस अभिमंत्रित धागे को अपने कारोबार के मुख्य द्वार पर बांध दे। नौकरी से संबंधित लोगों को अपनी चेयर या मेज की दराज में रख ले या कुर्सी पर यह धागा बांध लें। कारोबार व नौकरी में अवश्य स्थिरता आ जायेगी।

बचत के लिये
आप अनावश्यक खर्चें से परेशान है, आपके हाथ से न चाहते हुये भी खर्चा अधिक हो जाता हो तो यह प्रयोग आपके लिये बहुत ही लाभदायक रहेगा। किसी भी माह के पहले सोमवार को 11 गोमती चक्र, 11 कौड़ी, 11 लौंग लें। पीलेवस्त्र में रख कर अपने पूजा स्थान में रख दें। श्रद्धापूर्वक पंचोपचार पूजन करें। धूप, दीप, नैवेद्य, फूल, अक्षत अर्पित करें। तत्पश्चात ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्धलक्ष्मयै: नम:। 11 माला जाप करें। ऐसा 7 दिन नियमित रूप से पूजन और जाप करें। पुन: दूसरे सोमवार को श्रद्धापूर्वक पूजन और जाप के उपरांत उसमें से 4 गोमती चक्र, 4 कौड़ी, 4 लौंग घर के चारों कोनों में गड्डा खोदर कर डाल दें। शेष बचें 5 गोमती चक्र, 5 कौड़ी, 5 लौंग को लाल वस्त्र में बांधकर अपनी तिजारी में रख दें। और दो गोमती चक्र, दो कौड़ी और दो लोंग को श्रद्धापूर्वक किसी भी भगवान के मंदिर में अर्पित कर दें। मनोवांछित सफलता प्राप्त होगी।

दुकान की बिक्री बढ़ाने हेतु
आप मेहनत कर रहे हैं दुकान में पूरा सामान है परन्तु बिक्री नही हो रही हो अपनी दुकान में लक्ष्मी जी का चित्र लगाकर उनके आगे धूप व दीप जलाकर प्रणाम करें प्रणाम करके 108 बार ॐ नम: कमलवासिन्यै स्वाहा। मंत्र का जाप करने के बाद अपना कार्य आरंभ करें या दुकानदारी शुरू करें। कारोबार में वृद्धि होगी, ग्राहक आने लगेंगे और काम भी बढ़ेगा।

सोचा काम बनाने के लिए
संपूर्ण प्रयासो के बावजूद भी सोचा हुआ काम पूरा नहीं होता हो तो मंगलवार के दिन यह उपाय प्रारंभ करें। और लगातार 21 मंगलवार करें। हर मंगलवार को नित्यकर्म से निवृत होकर स्नानोपरांत जटा वाले नारियल के ऊपर सवा मीटर लाल कपड़ा लपेटकर 21 बार कलावा लपेट लें। तत्पश्चात लाल कपड़े के ऊपर 21 कुंकुम की बिंदी लगा लें। नारियल को अपने ऊपर से 21 बार उसार कर के अपने पूजाा स्थान में रख दें। वहीं बैठकर एक पाठ सुंदरकांड का पाठ करें। तपश्चात अपनी मनोकामना का ध्यान करते हुए इस नारियल को बहते पानी व तालाब में प्रवाह कर दें।

टोने-टोटके छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं। पर उनकी विधिवत जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस लोकप्रिय स्तंभ में उपयोगी टोटकों की विधिवत जानकारी दी जा रही है।

मनोकामना की पूर्ती हेतु
    * होली के दिन से शुरू करके प्रतिदिन हनुमान जी को पांच पुष्प चढाएं, मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी।
    * होली की प्रातः बेलपत्र पर सफ़ेद चन्दन की बिंदी लगाकर अपनी मनोकामना बोलते हुए शिवलिंग पर सच्चे मन से अर्पित करें। बाद में सोमवार को किसी मन्दिर में भोलेनाथ को पंचमेवा की खीर अवश्य चढाएं, मनोकामना पूरी होगी।

रोजगार प्राप्ति हेतु
    * होली की रात्री बारह बजे से पूर्व एक दाग रहित बड़ा नीबू लेकर चौराहे पर जाएं और उसकी चार फांक चारों कोनों में फेंक दें। फिर वापिस घर जाएं किन्तु ध्यान रहे, वापिस जाते समय पीछे मुड़कर न देखें। उपाय श्रद्धापूर्वक करें, शीघ्र ही बुरे दिन दूर होंगे व रोजगार प्राप्त होगा।
स्वास्थ्य लाभ हेतु

    * मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त रोगी को छुटकारा दिलाने के लिये जौ के आटे में तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें।
व्यापार लाभ के लिये
    * होली के दिन गुलाल के एक खुले पैकेट में एक मोती शंख और चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल कपडे में लाल मौली से बांधकर तिजोरी में रखें, व्यवसाय में लाभ होगा।
    * होली के अवसर पर एक एकाक्षी नारियल की पूजा करके लाल कपडे में लपेट कर दुकान में या व्यापार पर स्थापित करें। साथ ही स्फटिक का शुद्ध श्रीयंत्र रखें. उपाय निष्ठापूर्वक करें, लाभ में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होगी।

धनहानी से बचाव के लिये
    * होली के दिन मुख्य द्वार पर गुलाल छिडकें और उस पर द्विमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय धनहानि से बचाव की कामना करें। जब दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में डाल दें। यह क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, धन हानि से बचाव होगा।
दुर्घटना से बचाव के लिये
    * होलिका दहन से पूर्व पांच काली गुंजा लेकर होली की पांच परिक्रमा लगाकर अंत में होलिका की ओर पीठ करके पाँचों गुन्जाओं को सिर के ऊपर से पांच बार उतारकर सिर के ऊपर से होली में फेंक दें।
    * होली के दिन प्रातः उठते ही किसी ऐसे व्यक्ति से कोई वास्तु न लें, जिससे आप द्वेष रखते हों। सिर ढक कर रखें। किसी को भी अपना पहना वस्त्र या रूमाल नहीं दें। इसके अतिरिक्त इस दिन शत्रु या विरोधी से पान, इलायची, लौंग आदि न लें। ये सारे उपाय सावधानी पूर्वक करें, दुर्घटना से बचाव होगा।
आत्मरक्षा हेतु
    * किसी को कष्ट न पहुंचाएं, किसी का बुरा न करें और न सोचें। आपकी रक्षा होगी।
    * घर के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए। होली की ग्यारह परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए।. इससे सुख-सम्रद्धि बढ़ती है, कष्ट दूर होते हैं।


अनबन दूर करने के लिये

    * होली के दिन 5-5 रत्ती के 5 मोतियों का ब्रेसलेट पहनें। इसके अतिरिक्त हर पूर्णिमा को चांदी के पात्र में कच्चा दूध डालकर चन्द्रमा को अर्ध्य दें, पति-पत्नी की आपसी संबंधों में मधुरता आयेगी।


मतभेद दूर करने के लिये

    * पुत्र की पिता से न बनती हो तो अमावस्या, चतुर्दर्शीय या ग्रहण के दिन पुत्र पिता के जूतों से पुराने मोज़े निकाल कर उनमें नए मोज़े रख दे, दोनों के बीच चल रहा वैमनस्य दूर हो जाएगा।
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कष्ट निवारण - उपाय - 9

कार्यक्षेत्र के व्यवधान दूर करने हेतु
यदि आपका व्यवसाय तकनीकी क्षेत्र का है और आपके व्यवसाय में हमेशा कोई न कोई मशीन बहुत जल्दी खराब होती हो तो यह उपाय बहुत ही लाभदायक रहेगा। किसी भी माह के प्रथम गुरुवार के दिन हल्दी, कुंकुम और केसर की स्याही बनाकर नौ इंच सफेद कच्चे धागे को रंग लें। तत्पश्चात उसमें नौ गांठ लगा दें। मशीन के ऊपर उसी स्याही से स्वास्तिक बनाकर उस धागे को बांध दें। मशीन खराब नहीं होगी और कर्मचारी में मन लगाकर काम करेंगे

सुख-शांति हेतु
यदि आपके परिवार में हमेशा कलह रहता हो पारिवारिक सदस्य सुख शांति से न रहते हो तो शनिवार के दिन सुबह काले कपड़े में जटा वाले नारियल को लपेटकर उस पर काजल की 21 बिंदी लगा लें। और घर के बाहर लटका दें। हमेशा घर बुरी नजर से बच कर रहेगा और हमेशा सुख-शांति रहेगी।

कार्य सफलता के लिए
किसी भी शुभ कार्य के लिए घर से बाहर निकलने से पूर्व दही में गुड़ या चीनी मिलाकर सेवन करके बाहर निकलने से कार्य में सफलता मिलती है। साथ ही घर से बाहर निकलते समय अपने पास कुछ धन राशि रख दें इस धन राशि से किसी जरूरत मंद व्यक्ति को खाने की चींज देकर निकल जाएं कार्य सफलता मिल जाएगी।

यदि जातक के अपने कर्म ठीक है, कार्य व्यवसाय में वह ईमानदारी से परिश्रम करता हो, उसके बावजूद भी कार्य में सफलता नहीं मिल रही हो अथवा घर में शांति नहीं हो तो इस प्रयोग से अवश्य शांति मिलेगी। प्रतिदिन स्नान के जल में एक आम का पत्ता, एक पीपल का पत्ता, दुर्वा-11, तुलसी का एक पत्ता और एक बिल्व पत्र डालकर मृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए स्नान करें तो सभी प्रकार के ग्रह पीड़ा व कष्टों से मुक्ति मिलेगी। मंत्र इस प्रकार है।-

ओम त्रयम्बकं यजामहे सुगंधि पुष्टिवर्धनं ऊर्व्वारुकमिव वंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मां मृतात्।

भगवान दत्तात्रोय को ब्रह्मा-विष्णु-महेष की शक्तियों का संयोग कहा जाता है। अत: दत्ताात्रोय जी की साधना गूलर के पेड़ के नीचे बैठकर करने से शीघ्र फलदायी होती है। उत्तार पूर्व की ओर मुख करके 'ओम द्रां दत्तात्रोय नम:' मंत्रों का 21 दिन निरंतर 21 माला जप करने से बहुत लाभ मिलता है। पूजा में श्वेत चंदन, पुष्प और केवड़े के इत्रा का प्रयोग करना चाहिए।

अक्षय तृतीया या किसी भी शुक्रवार की रात्रि को कांसे या पीतल की थाली में काजल लगाकर काली कर दें और फिर चांदी की शलाका से लक्ष्मी का चित्र बनाएं चाहे वह कैसा भी बने, फिर चित्र के ऊपर ऐष्वर्य लक्ष्मी यंत्र स्थापित कर दें और एक निष्ठ होकर, मात्र एक सफेद धोती ही पहनकर, उत्तार दिषा की ओर मुंह कर, सामने गेहूं के आटे के चार दीपक बनाए और उसमें किसी भी प्रकार का तेल भरकर प्रज्जवलित करें और थाली के चारों कोनों पर रखे मूंगों की माला से निम्न मंत्र का एक रात्रि में 51 माला मंत्र जप करें। ओउम्ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं ह्रीं ह्रीं फट्॥ जब मंत्र पूरा हो जाए तो रात्रि में वहीं विश्राम करें और जमीन पर ही सो जाएं।

अगर आप कर्ज से परेषान है तो सफेद रुमाल लें। पांच गुलाब के फूल, एक चांदी का पत्ता, थोड़े से चावल, गुड़ लें। मंदिर में जाकर रुमाल को रखकर इन चीजों को हाथ में ले लें और 21 बार गायत्री मंत्र का पाठ करें। इनको इकठ्ठा कर कहें मेरी परेषानी दूर हो जाएं तथा मेरा कर्जा उतर जाए। फिर इन सबको ले जाकर बहते जल में प्रवाह कर दें। यह प्रक्रिया सोमवार को करनी चाहिए। अगर इसे विष्णु-लक्ष्मी की मूर्ति के सामने किया जाए तो और भी अच्छा होता है। इसे कम से कम 7 सोमवार करना चाहिए।

बचत के लिये
आप अनावश्यक खर्चें से परेशान है, आपके हाथ से न चाहते हुये भी खर्चा अधिक हो जाता हो तो यह प्रयोग आपके लिये बहुत ही लाभदायक रहेगा। किसी भी माह के पहले सोमवार को 11 गोमती चक्र, 11 कौड़ी, 11 लौंग लें। पीलेवस्त्र में रख कर अपने पूजा स्थान में रख दें। श्रद्धापूर्वक पंचोपचार पूजन करें। धूप, दीप, नैवेद्य, फूल, अक्षत अर्पित करें। तत्पश्चात ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं सिद्धलक्ष्मयै: नम:। 11 माला जाप करें। ऐसा 7 दिन नियमित रूप से पूजन और जाप करें। पुन: दूसरे सोमवार को श्रद्धापूर्वक पूजन और जाप के उपरांत उसमें से 4 गोमती चक्र, 4 कौड़ी, 4 लौंग घर के चारों कोनों में गड्डा खोदर कर डाल दें। शेष बचें 5 गोमती चक्र, 5 कौड़ी, 5 लौंग को लाल वस्त्र में बांधकर अपनी तिजारी में रख दें। और दो गोमती चक्र, दो कौड़ी और दो लोंग को श्रद्धापूर्वक किसी भी भगवान के मंदिर में अर्पित कर दें। मनोवांछित सफलता प्राप्त होगी।

स्वास्थ्य के लिये
यदि आपका बच्चा बहुत जल्दी-जल्दी बीमार पड़ रहा हो और आप को लग रहा कि दवा काम नहीं कर रही है, डाक्टर बीमारी खोज नहीं पा रहे है। तो यह उपाय शुक्ल पक्ष की अष्टमी को करना चाहिये। आठ गोतमी चक्र ले और अपने पूजा स्थान में मां दुर्गा के श्रीविग्रह के सामने लाल रेशमी वस्त्र पर स्थान दें। मां भगवती का ध्यान करते हुये कुंकुम से गोमती चक्र पर तिलक करें। धूपबत्ती और दीपक प्रावलित करें।धूपबत्ती की भभूत से भी गोमती चक्र को तिलक करें। ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे की 11 माला जाप करें। जाप के उपरांत लाल कपड़े में 3 गोमती चक्र बांधकर ताबीज का रूप देकर धूप, दीप दिखाकर बच्चे के गले में डाल दें। शेष पांच गोमती चक्र पीले वस्त्र में बांधकर बच्चे के ऊपर से 11 बार उसार कर के किसी विराने स्थान में गड्डा खोदकर दबा दें। आपका बच्चा हमेशा सुखी रहेगा।

आर्थिक सम्पनता के लिये
आप चाहते है कि आपकी आर्थिक संपंता स्थिर रहें के लिए उचित परिश्रम का लाभ प्रान्त हो, किसी भी माह के प्रथम शुक्ल पक्ष को यह प्रयोग आरंभ करें और नियमित 3 शुक्रवार को यह उपाय करें। प्रत्येक दिन नित्यक्रम से निवृत्त होकर स्नानोंपरांत अपने घर में अपने पूजा स्थान में घी का दीपक जलाकर मां लक्ष्मी को मिश्री और खीर का भोग लगायें। तत्पश्चात 11 वर्ष की आयु से कम की कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन करायें। भोजन में खीर और मिश्री जरूर खिलायें। भोजन के उपरांत श्रद्धानुसार लाल वस्त्र भेंट करें। ऐसा करने से मां लक्ष्मी की अवश्य कृपा होगी।

दांपत्य सुख हेतु
यदि चाहते हुए वैवाहिक सुख नहीं मिल पा रहा है, हमेशा पति-पत्नि में किसी बात को लेकर अनबन रहती हो तो किसी भी शुक्रवार के दिन यह उपाय करें। मिट्टी का पात्र ले जिसमें सवा किलो मशरूम आ जाएं। मशरूम डालकर अपने सामने रख दें। पति-पत्नि दोनों ही महामृत्युंजय मंत्र की तीन माला जाप करें। तत्पश्चात इस पात्र को मां भगवती के श्री चरणों में चुपचाप रखकर आ जाए। ऐसा करने से मां भगवती की कृपा से आपका दांपत्य जीवन सदा सुखी रहेगा।

रोजगार के लिये
अगर आपको रोजगार की समस्या आ रही हो या आपके व्यवसाय में आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा हो अथवा हाथ में आये अच्छे मौके निकले जा रहे हो तो ऐसी अवस्था में किसी भी माह के शुक्ल पक्ष को यह उपाय आरंभ करें। सौ ग्राम जौ, सौ ग्राम देसी चना, सौ ग्राम उड़द का आटा लें तीनों आटों को मिक्स करके गूंथ लें और इस आटे की 108 गोलियां बना लें। गोली बनाते समय ॐ श्रीं नम: का जाप करते रहें गोलियां बनाकर किसी स्वच्छ थाली में रख दें। तत्पश्चात दीपक जलायें और ॐ नम: कमलवासिन्यै स्वाहा। 11 माला जाप करें। और जप माला स्फटिक की प्रयोग करें तो बहुत अच्छा रहेगा। जप के बाद स्वच्छ पात्र में जल और गंगा जल भर कर माला को पात्र में रख दें। प्रात:काल उस जल में से माला को निकालकर उस जल को अपने घर, दुकान या व्यापारिक स्थान में छिड़क दें। ऐसा नियमित 108 दिन तक करें। 108 दिन के बाद माला को बहते पानी में प्रवाह कर दें।

कार्य बाधा निवारण के लिए
लाल कपड़े के ऊपर कुं कुम की स्याही बनाकर लाल चंदन की लकड़ी से गीता के ग्यारहवें अध्याय के 36वें शोक को श्रद्धापूर्वक लिखें। और अपने घर के दायीं ओर किसी भी कोने में टांग दें। किसी भी प्रकार की कार्य बाधा हो उसका निवारण हो जाएगा।

विवाह में विलम्ब के उपाय
जिस जातक की जन्म कुंडली में बृहस्पति नीच का हो, 6, 8, 12 भावों में क्रूर ग्रहों के साथ बैठा हो अथवा दृष्ट हो, प्रबल मार्केष हो तो ऐसी अवस्था में यह उपाय रामबाण का काम करता है। गुरुपुष्य नक्षत्र के दिन गुरु की होरा में केले की जड़ को पूजनादि करके खोदकर घर लाएं। उस जड़ को पूजन स्थान में रखकर श्रध्दापूर्वक बृहस्पति देवता का पूजन करके पीले कपड़े में लपेटकर अथवा सोने में जड़वाकर गले या दाहिनी भुजा में धारण करें। इससे गुरुजन्य दोषों का निवारण एवं व्यवसाय में लाभ होता है। साथ ही जिनके विवाह में विलम्ब हो रहा है उन्हें भी इस प्रयोग से शीघ्र लाभ होता है।

यदि किसी के विवाह में विलम्ब हो रहा है तो उसे बृहस्पतिवार का व्रत करना चाहिए। बृहस्पति व्रत कथा सुननी चाहिए तथा प्रत्येक गुरुवार को हल्दी की गांठ बिस्तर के नीचे लेकर सोएं।

यदि पति से झगड़ा होता है तो शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को पत्नी अषोक वृक्ष की जड़ में घी का दीपक और चंदन की अगरबत्ती जलाए, नैवेद्य चढ़ाए। पेड़ को जल अर्पित करते समय उससे अपनी कामना करनी चाहिए। फिर वृक्ष से सात पत्तो तोड़कर घर लाएं, श्रध्दा से उनकी पूजा करें व घर के मंदिर में रख दे। अगले सोमवार फिर से यह उपासना करे तथा सूखे पत्ताों को बहते जल में प्रवाहित कर दें।

समय पर विवाह न हो रहा हो तो शुक्ल पक्ष में किसी गुरुवार के दिन प्रात:काल उठकर स्नान करें। पीले वस्त्र पहल लें। बेसन को देषी घी में सेंककर बूरा मिलाकर 108 लड्डू बनाएं। पीले रंग की टोकरी में पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उसमें ये लड्डू रख दें। इच्छानुसार कुछ दक्षिणा भी रख दें। यह सारा सामान षिव मंदिर में जाकर गणेष, पार्वती तथा षिवजी का पूजन कर मनोवांछित वर प्राप्ति का संकल्प कर किसी ब्राह्मण को दे दें। इससे शीघ्र विवाह की संभावना बनेगी।
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टोने-टोटके - कुछ उपाय - 6
छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत् जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस लोकप्रिय स्तंभ में उपयोगी टोटकों की विधिवत् जानकारी दी जा रही है।

आँखों के रोग से मुक्ति के लिए

    * आँखों में यदि काला मोतिया हो जाए तो ताम्बे के पात्र में जल लेकर उसमें ताम्बे का सिक्का व गुड डालकर प्रतिदिन सूर्य को अर्ध्य दें। यह उपाय शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार से शुरू कर चौदह रविवार करें। अर्ध्य देते समय रोग से मुक्ति की प्रार्थना करते रहें। इसके अतिरिक्त पांच प्रकार के फल लाल कपडे में बांधकर किसी भी मन्दिर में दें। यह उपाय निष्ठापूर्वक करें, लाभ होगा।


नौकरी की प्राप्ति के लिए

    * नौकरी न मिल रही हो तो मन्दिर में बारह फल चढ़ाएं। यह उपाय नियमित रूप से करें और इश्वर से नौकरी मिलने की प्रार्थना करें।


शीघ्र विवाह के लिए

    * विवाह योग्य वर या कन्या के शीघ्र विवाह के लिए घर के मन्दिर में नवग्रह यन्त्र स्थापित करें। जिनकी नई शादी हो, उन्हें घर बुलाएं, उनका सत्कार करें और लाल वस्त्र भेंट करें उन्हें भोजन या जलपान कराने के पश्चात सौंफ मिस्री जरूर दें। यह सब करते समय शीघ्र विवाह की कामना करें। यह उपाय शुक्ल पक्ष के मंगलवार को करें, लाभ होगा।


मनोकामना पूर्ती के लिये

    * व्यापार मंदा हो तथा पैसा टिकता न हो, तो नवग्रह यन्त्र और धन यन्त्र घर के मन्दिर में शुभ समय में स्थापित करें। इसके अतिरिक्त सोलह सोमवार तक पांच प्रकार की सब्जियां मन्दिर में दें और पंचमेवा की खीर भोलेनाथ को मन्दिर में अर्पित करें। सभी कामनाएं पूरी होंगी।


कुछ अन्य टोटके

    *
      बच्चे पढ़ते न हों तो उनकी स्टडी टेबल पर शुभ समय में सरस्वती यन्त्र व कुबेर यन्त्र स्थापित करें। उनके पढने के लिये बैठने से पहले यंत्रों के आगे शुभ घी का दीपक तथा गुलाब की अगरबत्ती जलाएं। पढ़ते समय उनका मुंह पूर्व की ओर होना चाहिय। यह उपाय करने के बच्चों का मन पढ़ाई में लगने लगेगा और पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद उन्हें मनोवांछित काम भी मिल जायेगा।

    *
      समाज में मान सम्मन की प्राप्ति के लिये कबूतरों को चावल मिश्रित डालें, बाजरा शुक्रवार को खरीदें व शनिवार से डालना शुरू करें।

    *
      शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार या बुधवार को चमकीले पीले वस्त्र में शुद्ध कस्तूरी लपेटकर अपने धन रखने के स्थान पर रखें, घर में सुख-समृद्धी आयेगी।

    *
      यदि मार्ग में कोई सफाई कर्मचारी सफाई करता दिखाई दे तो उसे यह कहकर की चाय-पानी पी लेना या कुछ खा लेना, कुछ दान अवश्य दें, परिवार में प्यार व सुख-समृद्धी बढ़ेगी। यदि सफाई कर्मचारी महिला हो तो शुभ फल अधिक मिलेगा।

    *
      किसी भी विशेष मनोरथ की पूर्ती के लिये शुक्ल पक्ष में जटावाला नारियल नए लाल सूती कपडे में बांधकर बहते जल में प्रवाहित करें। यह उपाय निष्ठापूर्वक करें।

    *
      शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से नित्य प्रातः में अर्पित करें। फूल हनुमानजी को मन्दिर में अर्पित करें। फूल अर्पित करते समय हनुमान जी से मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना करते रहें। ध्यान रहे यह उपाय करते समय कोई आपको टोके नहीं और टोके तो आप उसका उत्तर न दें।

    *
      जन्म पत्रिका में 12वें भाव में मंगल हो और खर्च बहुत होता हो, तो बेलपत्र पर चन्दन से 'भौमाय नमः' लिखकर सोमवार को शिवलिंग पर चढ़ाएं, उक्त सारे कष्ट दूर हो जायेंगे।

शनिवार, 4 जून 2011

शांत चित

यदि हम अपना चित शांत कर लेंगे तो संसार के रोग और शोक समाप्त नहीं तो कम अवश्य कर सकते हैं 
वास्तु अवतार 

9013203040

सोमवार, 23 मई 2011

poojan samigri

पूजन सामग्री   
धप बत्ती (अगरबत्ती)
कपूर
केसर
चंदन
यज्ञोपवीत 5
कुंकु
चावल
अबीर
गुलाल, अभ्रक
हल्दी
आभूषण
नाड़ा
रुई
रोली, सिंदूर
सुपारी, पान के पत्ते
पुष्पमाला, कमलगट्टे
धनिया खड़ा
सप्तमृत्तिका
सप्तधान्य
कुशा व दूर्वा
पंच मेवा
गंगाजल
शहद (मधु)
शकर
घृत (शुद्ध घी)
दही
दूध
ऋतुफल
नैवेद्य या मिष्ठान्न
(पेड़ा, मालपुए इत्यादि)
इलायची (छोटी)
लौंग मौली
इत्र की शीशी
सिंहासन (चौकी, आसन)
पंच पल्लव
पूजन सामग्री
   
(बड़, गूलर, पीपल, आम और पाकर के पत्ते)
पंचामृत
तुलसी दल
केले के पत्ते
(यदि उपलब्ध हों तो खंभे सहित)
औषधि
(जटामॉसी, शिलाजीत आदि)
श्री सत्यनारायणजी का पाना
(अथवा मूर्ति)
गणेशजी की मूर्ति
अम्बिका की मूर्ति
सत्यनारायण को अर्पित करने हेतु वस्त्र
गणेशजी को अर्पित करने हेतु वस्त्र
अम्बिका को अर्पित करने हेतु वस्त्र
जल कलश (तांबे या मिट्टी का)
सफेद कपड़ा (आधा मीटर)
लाल कपड़ा (आधा मीटर)
पंच रत्न (सामर्थ्य अनुसार)
दीपक
बड़े दीपक के लिए तेल
बन्दनवार
ताम्बूल (लौंग लगा पान का बीड़ा)
श्रीफल (नारियल)
धान्य (चावल, गेहूँ)
पुष्प (गुलाब एवं लाल कमल)
एक नई थैली में हल्दी की गाँठ,
खड़ा धनिया व दूर्वा आदि
अर्घ्य पात्र सहित अन्य सभी पात्र

AAO JANE KUCHH VISHESH

सामान्यत: किसी भी स्थान पर खड़े हुए गणपतिजी के चित्र, विग्रह, प्रतीक निषिद्ध है
 गणेशजी के पुराण लिखते हुए चित्र के उपयोग अध्ययन कक्ष में करना शुभ फलदायी होता है।
 व्यापार स्थल पर गणेशजी का बैठा हुआ प्रतीक, चित्र या विग्रह शुभ फलदायी होता है।
 गणेशजी का चित्र उत्तर की दीवार पर इस प्रकार लगाना चाहिए जिससे उनका मुंह दक्षिण की ओर न हो।
 गणेशजी को काले रंग के वस्त्र अप्रिय हैं
 काले रंग का कपड़ा क्षेत्रपाल व शनि देव के अतिरिक्त किसी देवता को नहीं अर्पित करना चाहिए।
 गणेशजी का मुंह दक्षिण दिशा में होने से ऋणात्मक प्रभाव मिलते हैं।
 पूजन कक्ष में फ्रिज नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
 आरती में बत्तियों की संख्या हमेशा विषम अंक में होना शुभ फलदायी होता है।
 भगवान को नैवेद्य लगाने के पात्र में स्वयं नहीं खाना चाहिए।
 प्रतिदिन आधी घटी अर्थात 12 मिनट से कम ईश्वर की आराधना किसी भी स्थिति में नहीं करना चाहिए।
 कटा हुआ फल भगवान को नैवैद्य में नहीं रखना चाहिए।
 किसी भी शुभ प्रतीक का पूर्ण चित्र ही घर में लगाना चाहिए।
 अविवाहित नातिन की मृत्यु का नाना-नानी को सूतक नहीं लगता है।
 विवाहित नातिन की मृत्यु का नाना-नानी को सूतक नहीं लगता है
 अविवाहित नाती की मृत्यु का नाना-नानी को डेढ़ दिन का सूतक लगता है।
 विवाहित नाती की मृत्यु का नाना-नानी को 3 दिन का सूतक लगता है।
- नानी की मृत्यु का अविवाहित पोता-पोती को सूतक नहीं लगता है।
- नानी की मृत्यु का सूतक विवाहित पोता-पोती को डेढ़ दिन का ही लगता है।
- नाना की मृत्यु का अविवाहित पोता-पोती सूतक नहीं लगता है।
 नाना की मृत्यु का विवाहित पोता-पोती के दूसरे शहर में होने से डेढ़ दिन का सूतक लगता है।
 नाना की मृत्यु का विवाहित पोता-पोती को उसी शहर में रहने से तीन दिन का सूतक लगता है।
- सौतन की मृत्यु का सूतक दस दिन तक रहता है।
 पत्नी को पति की मृत्यु का सूतक दस दिन तक लगता है।
 अविवाहित बहन की मृत्यु का अविवाहित बहन को सूतक नहीं लगता है।
 पति को पत्नी की मृत्यु का सूतक दस दिन का होता है।
 अविवाहित बहन की मृत्यु होने पर भाई को दस दिन का सूतक लगता है।
 विवाहित बहन की मृत्यु शहर से बाहर अन्य स्थान पर होने से भाई को एक दिन का सूतक लगता है।
 विवाहित बहन की मृत्यु एक ही शहर में होने से भाई को दो दिन का सूतक होता है।
कन्या (संतान) का जन्म होने पर सूतिका की (माता की) शुद्धि चालीस दिन पश्चात ही होती है।
 पिता के घर अर्थात पति की ससुराल में यदि स्त्री किसी संतान को जन्म दे तो माता-पिता (नाना-नानी) को एक दिन का शौच रहता है।
 मृतक संतान पैदा होने पर माता को दस दिन व अन्य कुलजन को भी दस दिन का शौच होता है।
 सातवें माह के पश्चात कभी भी प्रसव होने पर दस दिन का शौच कुलजन को होता है।
 छ: माह से अधिक व सात माह के मध्य गर्भपात होने पर माता को छ: दिन का शौच रहता है।
 पाँच माह से अधिक व छ: माह से कम में गर्भपात होने पर माता को छ: दिन का शौच होता है।
 चार माह से अधिक व पाँचवे माह तक गर्भस्त्राव होने पर माता को पाँच दिन का शौच होता है। दिन का पर्व- मत्स्य जयंती।
 तीन माह से अधिक व चार माह तक के गर्भस्त्राव होने पर माता को चार दिन का शौच होता है।
 पहले तीन माह के अंदर गर्भस्त्राव होने पर माता को तीन दिन का शौच होता है
 नवरात्रि के जवारों को बिना स्नान किए स्पर्श नहीं करना चाहिए।
- नवरात्रि के जवारों की प्रतिदिन पुष्‍प, गंध, अक्षत आदि से पूजन करना चाहिए।
 नवरात्रि के जवारे जितने अधिक बढ़ते हैं उतना ही समृद्धि के प्रतीक होते हैं।
 नवरात्रि समाप्ति के पूर्व जवारे को तोड़ना या उखाड़ना नहीं चाहिए।
 नवरात्रि में बोए जाने वाले जवारे शुद्ध व नए मिट्‍टी के पात्र में ही बोना शुभ रहता है।
- नवरात्रि में बोए जाने वाले जवारों को नवरात्रि समाप्त होने ‍तक ही स्थान पर रखे रहने देना चाहिए।
 नवरात्रि में बोए जाने वाले जवारे गेहूँ के अलावा जौ, चावल अथवा अन्य धान्यों के भी बोए जा सकते हैं।
 भवन के अग्नि कोण में पलंग होने से उपयोगकर्ता को नींद में परेशानी आती है
 भवन के अग्नि कोण में अंधेरा होने से स्त्री पक्ष को निराशा आने की संभावना रहती है।
उपयोगी ज्ञान- भवन के अग्नि कोण में तरल पदार्थ में सिर्फ ईंधन ही रखना उचित होता है।
 भवन के अग्नि कोण में काला रंग होने से कार्य में बाधाएँ आती हैं।
- भवन के अग्नि कोण (पूर्व-दक्षिण का कोना) में जल रखने से निराशा आती है।
 यज्ञ आदि पुण्य कार्य के निमंत्रण पत्र को कार्य पूर्ण होने पर जल में विसर्जन करना शुभ होता है।
 यज्ञ आदि पुण्य कार्य के निमंत्रण पत्र को जलाने से दोष लगता है व हानि होती है।
उपयोगी ज्ञान- यज्ञ आदि पुण्य कार्य के निमंत्रण पत्र पर खाद्य सामग्री रखने से सेहत में परेशानी आने की संभावना रहती है।
 यज्ञ आदि पुण्य कार्य के निमंत्रण पत्र को उलटा रखने से ऋणात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
 यज्ञ आदि पुण्य कार्य के निमंत्रण पत्र को कार्यक्रम पूर्ण होने तक रखना शुभ फलदायी होता है।
 यज्ञ आदि पुण्य कार्य के निमंत्रण पत्र को तोड़ना, काटना, फाड़ना अशुभ फलदायी होता है
 यज्ञ आदि पुण्य कार्य के निमंत्रण पत्र पर लिखना या काँट-छाँट करने से निराशा आने की सभावना बनती है।
 यज्ञ आदि पुण्य कार्य का निमंत्रण पत्र हमेशा सम्मानजनक स्थान पर ही रखना चाहिए।
 भवन के केंद्र अथवा ब्रह्म स्थान को भाररहित रखना चाहिए।
 भवन के पश्चिम दिशा में पूर्व दिशा की तुलना में कम खाली जगह छोड़ना शुभ फलदायी रहता है।
 भवन की दक्षिण दिशा में उत्तर से कम खाली स्थान छोड़ना चाहिए।
 भवन के दक्षिण दिशा में उन्नत वृक्ष को लगाना अनुकूल फलदायी होता है।
 भवन के पश्चिम में बड़े पेड़ों को लगाना शुभ फलदायी होता है।
 भवन के पूर्व दिशा में बगीचा अथवा खाली स्थान होना भी उत्तम होता है।
 शयन कक्ष के पूर्वी-आग्नेय में लगाया गया दर्पण शुभ फलदायी नहीं होता है।
 शयन कक्ष के दक्षिणी-आग्नेय में लगा दर्पण शुभ फलदायी होता है।
 शयन कक्ष के दक्षिणी-नैऋत्य में दर्पण लगाना वास्तु दोष कहलाता है।
 शयन कक्ष के पश्चिमी-नैऋत्य में दर्पण लगाना शुभ फलदायी नहीं होता है।
 शयन कक्ष के उत्तरी-वायव्य में दर्पण लगाना भी शुभ फलदायी नहीं होता है
 शयन कक्ष के पश्चिमी-वायव्य में दर्पण लगाना भी शुभ स्थिति में रहता है।
 शयन कक्ष के पूर्वी-ईशान में दर्पण लगाना शुभ होता है। लेकिन सोने वाले का अक्स उसमें दिखाई नहीं देना चाहिए।
- शयन कक्ष के उत्तरी-ईशान में दर्पण लगाना शुभ होता है। बशर्ते सोने वाले प्रतिबिंब उसमें ना दिखाई दें।
 शयन कक्ष में पलंग के सामने दर्पण होने से उस पर सोने वालों के रोग ग्रस्त होने की संभावना रहती है।
 विवाहादि शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र पर आमंत्रित व्यक्ति का पूरा नाम लिखना चाहिए।
 विवाहादि शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र पर पूर्वजों का नाम आदर सूचक प्रकार से लिखना चाहिए।
 विवाहादि शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र में गणेशजी का नाम, चित्र या प्रतीक चिह्न होना शुभफलदायी होता है।
 विवाहादि शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र में कुलदेव का नाम, चित्र या प्रतीक चिह्न होना शुभ होता है।
 विवाहादि शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र में टूटे हुए अनाज, अक्षत आदि का उपयोग नकारात्मक ऊर्जादायक होता है।
 विवाहादि शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र में खंडित पत्तियों का चित्र होना नकारात्मक ऊर्जादायक होता है।
 विवाहादि शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र में काले धागे का उपयोग नकारात्मक ऊर्जादायक होता है।
 विवाहादि शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र में उजाड़ वृक्ष का चित्र होना नकारात्मक ऊर्जादायक होता है।
 विवाहादि शुभ कार्य के निमंत्रण पत्र में किसी भी आकृति या लिपि को उल्टा नहीं लिखना चाहिए।
 विवाहादि शुभ प्रसंग के निमंत्रण पत्र पर किसी भी शुभ प्रतीक चिह्नों की आकृति को विकृत करना शुभ नहीं है।
 विवाहादि शुभ प्रसंग के निमंत्रण पत्र में प्रतीक चिह्नों का उपयोग अवश्य करना चाहिए।
 विवाह आदि शुभ प्रसंग का निमंत्रण पत्र कटे-फटे होना अशुभ माना जाता है।
 विवाह आदि शुभ प्रसंग का निमंत्रण पत्र काले रंग का होना अशुभ माना जाता है।
 विवाह आदि शुभ कार्य का निमंत्रण पत्र त्रिकोणाकार होना शुभ नहीं होता है।
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 दरवाजे के पास लकड़ी या बाँस रखा होना भी अशुभ शकुन होता है। 
 दरवाजे के पास तेल रखना अशुभ शकुन होता है।
 भवन के ईशाण कोण में मिश्रित रंग करने से तनाव होने की संभावना होती है।
भवन के ईशान कोण में चमकीला रंग होने से खुशहाली में वृद्धि होती है।
भवन के ईशान कोण में गुलाबी रंग होने से मन में प्रसन्नता आती है।
उपयोगी ज्ञान- भवन के ईशान कोण में नीला रंग होने से आलस्य बढ़ने की संभावना बनती है।
 भवन के ईशान कोण में पीला रंग होने से प्रगति के अवसर आते हैं
 भवन के ईशान कोण में सफेद रंग शुभ फलदायी होता है।
 ईशान कोण में हरा रंग शुभ फलदायी होता है।
 भवन के ईशान कोण में काला रंग मध्यम फलदायी होता है।
 पूर्व-उत्तर के कोने (ईशान कोण) में लाल रंग मध्यम फलदायी होता है।
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पूर्णिमा से नए जूते पहनना आरंभ करने से मनोबल में कमी आती है।
 अमावस्या से नए जूते पहनना आरंभ करने से आकस्मिक परेशानी आने की संभावना बनती है।
 शनिवार से नए जूते पहनना प्रारंभ करने से कार्य में विलंब से सफलता मिलती है।
शुक्रवार से नए जूते पहनना प्रारंभ करना शुभ फलदायी होता है।
 गुरुवार से नए जूते पहनना प्रारंभ करने से परिजन का सुख मिलता है।
 बुधवार से नए जूते पहनना प्रारंभ करने से प्रसन्नता मिलने का योग बनाता है।
 मंगलवार से नए जूते पहनना प्रारंभ करने से आर्थिक परेशानी का योग बनाता है।
सोमवार को नए जूते पहनना प्रारंभ करने से शारीरिक सुख आने का योग बनाता है।
 रविवार से नए जूते पहनना प्रारंभ करने से मानसिक तनाव आता है।
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 कम्प्यूटर पर अधिक समय तक कार्य करना हो तो मुँह पूर्व या उत्तर में रखना चाहिए।
 कम्प्यूटर और तरल पदार्थ को एक साथ नहीं रखना चाहिए।
 देव स्थान में उपयोग की जाने वाली वस्तु जिस देवता की हो उसी देवता के लिए उसका उपयोग होना चाहिए।
 देव स्थान में उपयोग में आने वाली निर्माण सामग्री नवीन होनी चाहिए।
 देवता के लिए उपयोग में आने वाले गंध, चंदन, पुष्‍प का उपयोग देवताओं को अर्पित करने के पूर्व स्वयं नहीं करें।
 देवस्थान में जलाएँ जाने वाले दीपक में गाय के घी का उपयोग अति उत्तम होता है।
 देवस्थान में अर्पित किया जाने वाला जल उसी दिन जल स्त्रोत से निकला हुआ होना शुभफलदायी होता है
 देवस्थान में अर्पण किए जाने वाले पुष्प स्वयं के घर में या पास में रात्रिकाल में नहीं रखना चाहिए।
 देवस्थान पर दी जाने वाली पूजन सामग्री का दोबारा उपयोग न हो इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
 देवस्थान पर दान दिए जाने वस्त्र बिना उपयोग किए होना शुभफलदायी होता है।
 देवस्थान पर दान दी जाने वाली खाद्य वस्तु का निर्माण स्वयं पवित्रता से करना ही शुभफलदायी होता है।
 घर के स्थिर आईने में पूजन सामग्री दिखाई देना शुभफलदायी होता है।
 घर के स्थिर आईने में बिल्वपत्र, पान, कंदब का प्रतिबिंब दिखाई देने से शुभफलदायी होता है
 घर के स्थिर आईने में पुष्प का प्रतिबिंब दिखाई देने से शुभफलदायी होता है।
 घर के स्थिर आईने में शुभ प्रतीक चिह्नों का प्रतिबिंत दिखाई देने से शुभफलदायी होता है।
 घर के स्थिर आईने में शुद्ध जल का प्रतिबिंब दिखाई देना शुभ फलदायी रहता है।

शनिवार, 7 मई 2011

namaskaar ya namastey


*किसी से मिलते वक्त : कुछ लोग राम-राम, गुड मार्नींग, जय श्रीकृष्ण, जय गुरु, हरि ओम, साई राम या अन्य तरह से अभीवादन करते हैं। लेकिन संस्कृत शब्द नमस्कार को मिलते वक्त किया जाता है और नमस्ते को जाते वक्त। 

webdunia 

शनिवार, 23 अप्रैल 2011

KUCHH AUR VISHESH


Wake Up Call
Make paste of honey and ginger and apply this paste on face every morning before brushing teeth. This will prevent wrinkles to a greater extent.

Rich Olive
Massage is very useful as it increases blood circulation and result in tightening of skin. Use olive oil to massage your skin daily. Remember to massage in anticlockwise

Ample Apple
Cut apple’s thin slices and rub it on affected area, wash with warm water after 10 min. It helps in controlling oily shine.

Healthy Haldi
Make a paste using Haldi (Turmeric) with a little raw milk and lemon juice. Apply it on the skin, it will help in removing a tan.

Sweet Honey
Prepare mixture of honey, lemon and vegetable oil. Apply this paste on dry skin and wash after 10-15 min. This mixture is a good moisturizer for dry skin.

Fruit Lunch
Make it a habit to add lots of fruits as part of your meals. Take fruits without adding any salt and sugar to it. Eat wide variety of fruits and vegetables, including dark green vegetables and feel the difference in your skin.

Ideal Drink
Make a habit of drinking 2 glass of water early in the morning. Drinking water early in the morning will bless you with shiny and healthy skin.

Utterly Buttery
Buttermilk is another proven recipe to fade the sun tan. Wash you face with Buttermilk regularly for a few days and you would notice the difference. Being a natural astringent, it tones the skin and is ideal for oily to combination skin.

Morning Buzz
Try to take food that contains more calories (as compare to night) in morning and noon. This way you might eat less in the evening. It gives more time and chance for burning the calories during day and noon.

Moisturizing
Applying moisturizer after a warm face wash or a warm shower is the best remedies for skin. Moisturizing helps to restore the oils that our skin has and helps to keep the skin hydrated.

Greedy Grapes
Add 3-4 tablespoons of oatmeal to the juice of a grapefruit. Mix to thick paste. Spread on face and leave on 15 minutes, remove with luke warm water. Get healthy and smooth skin quickly.

गुरुवार, 31 मार्च 2011

vaastuavtaar: manglik vichar

vaastuavtaar: manglik vichar: "अनेक बार ऎसा होता है कि कुण्डली में मांगलिक योग बनता है. परन्तु कुण्डली के अन्य योगों से इस योग की अशुभता में कमी हो होती है. अपूर्ण जानकारी..."

aaj ki taza khabar