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रविवार, 5 दिसंबर 2010

vaastu

किसी व्यक्ति  वस्तु, स्थान, देश आदि को जानने और सरलता से उसे पहचानने हेतु प्राचीन कालसे उसके नामकरण की प्रथा रही है। जिसका उल्लेख वेद पुराणों में मिलता है।
रामायण काल में भी नाम रखने का उल्लेख इस चौपाई से मिलता हैः-
नामकरन कर अवसरू जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी॥

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