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सोमवार, 16 जनवरी 2012

प्राथना

हे ईश्वर  
यह विडंबना ही है की मेरी जीविका दूसरों की समस्याओं पर
निर्भर है
यह भी मेरा सोभाग्य  ही है की आपने उन समस्याओं का समाधान करने के लिए
उत्तम अवसर  भी दिया

ओर
यह उतरदायित्व पूरा करने की तोफीक भी मुझे वरदान में दी......
हे प्रभु
मुझ पर अपनी किरपा भरी दृष्टि  सदेव रखना जिससे में इस कार्य को पूरण निष्ठाके साथ पूरण
कर सकूं ओर मेरी वाणी कभी भी असत्य न हो

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