लोकप्रिय पोस्ट

सोमवार, 11 अक्टूबर 2010

प्रिय पाठक

ज्योतिष के गंभीर विषय को अति सरल ओर सत्य रूप में जानने के लिएया कुछ अनुभव आपके सामने लिख रहा हूँ
प्रत्येक मानव के जीवन पर नव ग्रहों का दो तरह से प्रभाव से असर होता है

पहला : जन्मसमय अनुसार कुंडली के अन्दर नवग्रह जिस २ स्थान पर अच्छा या बुरा सवभाव लेकर बेठाहो उसका फल के साथ हमेशा जुड़ारहता है ओर दूसरी ओर नवग्रहों द्वारा पंचांग गोचर गति के अनुसार राशी परिवर्तन करते रहने के कारन से हर एक लगनवालोपर अलग रूप से अच्छा बुरा पर्भाव होता है
अतः हर व्यक्ति को अपने जीवन की पूरी जानकारी के लिए पहले तो अपनी कुंडली के अधर पर ग्रहों का फलादेश जानलेना चाहिएओर दूसरा पंचांग के अधार पर जो जो गृह जिन जिन राशी पर चलता हो उसका फलादेश जानना चाहिए
अतः इस प्रकार फलादेश जानने से जीवन का नक्शा भूतभविष्य ओर वर्तमान का ज्ञान होता रहेगा

विशेष ::: जन्म कुंडली के अन्दर स्थापित नवग्रह में जो गृह २७ अंश से ऊपर या ३ अंश से निचे होगा या सूर्य से अस्त होगा अपनी शक्ति के अनुसार पूरा फल नहीं देगा

शेषफिर
वास्तुअचार्य
० ९०१३ २० ३० ४०

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें