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बुधवार, 15 दिसंबर 2010

astrology vaastu course

If you are on a visit to HARIDWAR OR DELHI at present or are going to visit HARIDWAR OR DELHI in coming months ...
and want to obtain Astrological .Vaastu Consultation from VAASTU ACHARYA AVTAAR SINGH in person or want to learn VEDIC ASTROLOGY (Horoscope Reading) VAASTU OR FENG SHUI, OR NUMEROLOGY, RUDRAKSH THEREPY ....
  but are unable to come to centre in HARIDWAR OR DELHI  then you can request to come to your office for your purpose.
09013203040

रविवार, 5 दिसंबर 2010

vaastu

Most people r not able to choose or design their own building to live or work in. However , we r probaly in a position to make changes to our work enviorment that will make our life more pleasant n enjoyable.
vaastu acharya
astropujacentre@gmail.com

karz mukti ke upaae

क़र्ज़ मुक्ति के उपाए

गृह के मुख्या द्वार पर श्री दुर्गा बीसा यंत्र स्थापित करें
ओर नित्य धूप दीप अर्पित करे तो क़र्ज़ मुक्ति में
सहायता मिल सकती है
वास्तु आचार्य
९०१३२०३०४०

vaastu

किसी व्यक्ति  वस्तु, स्थान, देश आदि को जानने और सरलता से उसे पहचानने हेतु प्राचीन कालसे उसके नामकरण की प्रथा रही है। जिसका उल्लेख वेद पुराणों में मिलता है।
रामायण काल में भी नाम रखने का उल्लेख इस चौपाई से मिलता हैः-
नामकरन कर अवसरू जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी॥

numerology+++++

एस्ट्रो न्यूमरोलॉजी में नेम थेरेपी

एस्ट्रो न्यूमरोलॉजी में नेम थेरेपी
किसी व्यक्ति वस्तु, स्थान, देश आदि को जानने और सरलता से उसे पहचानने हेतु प्राचीन काल से उसके नामकरण की प्रथा रही है। जिसका उल्लेख वेद पुराणों में मिलता है। रामायण काल में भी नाम रखने का उल्लेख इस चौपाई से मिलता हैः-

नामकरन कर अवसरू जानी। भूप बोलि पठए मुनि ग्यानी॥

अर्थात्‌ जब महाराज दशरथ जी के यहाँ यज्ञादि प्रयासों द्वारा साक्षात्‌ श्री हरि ने नर अवतार धारण किया तब वह नामकरण के लिए गुरु को बुलावा भेजते हैं। बड़े ही सोच-विचार कर ग्रहादि स्थिति को समझ कर महर्षि वशिष्ठ जी ने चारों भाइयों का नाम रखा। जिसमें बड़े भाई का नाम इस चौपाई द्वारा व्यक्त किया गया है।

जो सुख धाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा॥

इसी प्रकार भविष्य संबंधी पुराणों में तथा ज्योतिष ग्रंथों में नाम रखने के संदर्भ में वर्णन मिलता है। ज्योतिष के माध्यम से किसी जातक के जन्म समय के ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति से बालक/ बालिका का नामाक्षर निकालकर उसका नामकरण किया जाता है। इसी प्रकार अंकशास्त्र में भी नाम नंबर, उसका प्रभाव, लाइफ पाथ नंबर आदि का विचार किया जाता है। जो कि उस व्यक्ति, वस्तु, स्थान, देश, पदार्थ, संस्था, व्यवसाय, कारोबार को प्रभावित करते हैं।

नामकरण की विधा आज इतने लंबे अन्तराल के बावजूद भी अपने प्रभाव को कायम रखे हुए है। विज्ञान के क्षेत्र में भी यह आसानी से देखा जा सकता है कि वैज्ञानिक किसी खोज का नाम रखते समय बड़ी सावधानी बरतते हैं। उसे एक ऐसा नाम देते हैं जिससे उसे न सिर्फ सरलता से पहचाना जा सके बल्कि उसके महत्व को आसानी से बढ़ाया जा सके।
आज के बदलते परिवेश में जहाँ लोग बिना सोचे-समझे ही बालक/बालिकाओं के नाम रख देते हैं। जिनका उच्चारण व अर्थ तो जटिल होते ही हैं। साथ ही ग्रह-नक्षत्र व अंकशास्त्र की अंकीय शक्ति उस व्यक्ति, संस्था, स्थान, देश, व्यावसाय को हानि पहुँचाते हैं।
नेम थेरेपी अंग्रेजी का शब्द है जिसकी उपयोगिता जीवन के विश्लेषण और सुधार से है। सरल शब्दों में व्यक्ति के नाम को सुधार कर उसके भाग्य में वृद्धि की जा सकती है। उसके प्रभाव से व्यक्ति अंकीय शक्ति से संचालित ब्रह्मांड की लौकिक ऊर्जा प्राप्त कर सकता है।
नामाक्षर व अंक प्रभाव बड़ा ही चमत्कारी है। यदि किसी व्यक्ति का नामाक्षर और नामांक संयोग से अनुकूल है तो वह सेहतमंद रहते हुए विकास की राह पर बढ़ता है। उसके आचार-विचार व व्यवहार बड़े ही लोकप्रिय होते हैं। वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी में आपसी प्यार व सहयोग रहता है। माता-पिता, भाई-बहन व अन्य परिजनों के साथ उसका तालमेल बना रहता है। वह व्यापारिक और सामाजिक रिश्ते बड़ी ही कुशलता से निभा लेता है।
किन्तु जिस व्यक्ति का नामाक्षर व नामांक आदि सही नहीं है वह कई प्रकार की पीड़ाओं, रोग आदि से ग्रस्त रहता है। उसके आचार-विचार व व्यवहार उपयुक्त नहीं होते। दाम्पत्य जीवन में कलह बढ़ने लगता है। व्यावसायिक व सामाजिक रिश्तों को सही ढंग से कायम नहीं रख पाता।
नेम थेरपी के अन्तर्गत जातक के जन्म, समय व स्थान आदि पहलुओं का मूल्यांकन कर आवश्यकतानुसार उसे बदला जाता है। उसमें नए अंक व नामाक्षर द्वारा नई ऊर्जा का संचार किया जाता है।
नेम थेरेपी से दाम्पत्य जीवन के झगड़ों को समाप्त करने में आश्चर्यजनक सफलता प्राप्त हुई है। अक्षर व अंकों को जोड़कर तालमेल स्थापित करने में नेम थेरेपी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर बिजनेस, ग्लैमर और फैशन की दुनिया में इस थेरेपी ने खासा कमाल दिखाया है।
इसी प्रकार सेहत, माता-पिता, व्यक्तिगत रिश्तों तथा व्यावसायिक रिश्तों में नेम थेरेपी से मधुरता लाई जा रही है। आमदनी बढ़ाने और इच्छित प्रतियोगी क्षेत्रों में सफलता हेतु भी यह विधा बहुत सहायक है।
आज कई नाम लेखन, राजनीति, कानून, आध्यात्म, संगीत, नृत्य, फिल्म, अभिनय, व्यापार, कला, उद्योग जगत में प्रख्यात हैं।
कुछ शख्सियतों को नामाक्षर व नामांक की शक्ति ने इतना लोकप्रिय बना दिया कि देश-विदेश में उनके असंख्य प्रशंसक हैं।
नेम थेरपी द्वारा आप भी नाम व नामांक की शक्ति को जान सकते हैं।
ACHARYA
VAASTU AVTAAR
09013289566
09013203040
09868216175

kaal sarp yoga

लाल
किताब कालसर्प को योग मानता है.
राहु और केतु विभिन्न खानों में बैठकर 12 तरह के
विशेष योग बनाते हैं
अन्य ग्रह अलग अलग खानो में बैठकर शुभ और
...अशुभ फल देते हैं
राहु केतु भी शुभ और अशुभ दोनों प्रकार के फल
देते हैं.
ज्योतिष में राहु को सांप का सिर और केतु को उसका दुम
माना गया है.
कुण्डली में
सूर्य से लेकर शनि तक सभी सात ग्रह जब राहु और
केतु के बीच होते हैं तब कालसर्प योग बनता है.

manglik yog

चूंकि विवाह के बाद सभी दाम्पत्य जीवन में सुख की कामना करते है.
जबकि
मांगलिक योग से इन इसमें कमी होती है.
जब मंगल कुंण्डली के लग्न,
द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में स्थित होता है
...तो व्यक्ति
मांगलिक होता है.
परन्तु मंगल का इन भावों में स्थित होने के अलावा भी
मंगल के कारण वैवाहिक जीवन के सुख में कमी आने की अनेक संभावनाएं बनती है.

manglik vichar

अनेक बार ऎसा होता है कि कुण्डली में मांगलिक योग बनता है.
परन्तु कुण्डली
के अन्य योगों से इस योग की अशुभता में कमी हो होती है.
अपूर्ण जानकारी के कारण अपने मन में मांगलिक योग से प्राप्त होने
वाले अशुभ प्रभाव को लेकर भयभीत होते रहते है.
... विवाह के बाद एक
नये जीवन में प्रवेश करते समय मन में दाम्पत्य जीवन को लेकर किसी भी
प्रकार का भ्रम नहीं रखना चाहिए.
ANY ??? ASK>> 9013289566

rahukaal

राहु-काल व्यक्ति को सावधान करता है. कि यह समय अच्छा नहीं है
इस समय में
किये गये कामों के निष्फल होने की संभावना है.
इसलिये, इस समय में कोई भी
...शुभ काम नहीं किया जाना चाहिए.
कुछ लोगों का तो यहां तक मानना है की इससे
किये गये काम में अनिष्ट होने की संभावना रहती है.

raahukaal

दक्षिण भारत में प्रचलित:
राहु काल का विशेष प्रावधान दक्षिण भारत में है.  यह
सप्ताह के सातों दिन निश्चित समय पर लगभग डेढ़ घण्टे तक रहता है. इसे अशुभ
...समय के रुप मे देखा जाता है. इसी कारण राहु काल की अवधि में शुभ कर्मो को
यथा संभव टालने की सलाह दी जाती है.

rahukaal

राहु काल अलग- अलग स्थानों के लिये अलग-2 होता है. इसका कारण यह है की
सूर्य के उदय होने का समय विभिन्न स्थानों के अनुसार अलग होता है. इस
सूर्य के उदय के समय व अस्त के समय के काल को निश्चित आठ भागों में बांटने
से ज्ञात किया जाता है.

 

raahukaal

Avtar Singh Singh राहु काल के समय में किसी नये काम को शुरु नहीं किया जाता है
जो काम इस समय से पहले शुरु हो चुका है उसे राहु-काल के समय
में बीच में नहीं छोडा जाता है.
कोई व्यक्ति अगर किसी शुभ काम को इस समय
में करता है तो यह माना जाता है की उस व्यक्ति को किये गये काम का शुभ फल
...नहीं मिलता है.
उस व्यक्ति की मनोकामना पूरी नहीं होगी. अशुभ कामों के
लिये इस समय का विचार नहीं किया जाता है.

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

maah shivratri

aap sab bhagat jan ko maah shivraatri par shubh kaamnaaon ke sath 
vaastu acharya

RUDRAKSH

एक मुखी रुद्राक्ष : 
मानसिक अशांति ,शत्रुओ के षड्यांतर से निर्भय 
आर्थिक समृधि सर्व कार्य सीधी प्राप्ति हेतु 
परमतत्व ओर सहज ही इश्वर प्राप्ति के लिए 
दो मुखी रुद्राक्ष :
अर्धनारीश्वर को प्रसन करने के लिए 
तीन  मुखी रुद्राक्ष : 
अग्नि रूप त्रि मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से ब्रह्म हत्या जेसे ज्घन्ये अपराध से मुक्त करने की शक्ति देता है 
चार मुखी रुद्राक्ष ::
ब्रह्मसवरूप उत्तम आरोग्य  की प्राप्ति के लिए उत्तम अति उत्तम महाज्ञान शुधि ओर सम्पति के नियत मानव को धारण करना चाहिए
पांच मुखी रुद्राक्ष : 
इस रुदार्कालाग्नी  पंच्ब्रह्म रुद्राक्ष को धारण करने से शिव खुश हो जाते हैं 
जहां शिव सदाशिव खुश हो जाएं क्या कुछ मांगने की बात रह जाएगी ? 
छ मुखी रुद्राक्ष : 
कार्तिकेय देव ओर गणेश जी के इस रुद्राक्ष के धारण करने वाले भगत पर प्रसन हो जाते हैं  
सात मुखी रुद्राक्ष :  
सूर्य देव सप्तरिशी ओर सात माता सभी का आशीर्वाद मिलता है, शनि देव भी प्रसन कोटे हैं  ओर माँ लक्ष्मी  जी  
की प्राप्ति के साथ ज्ञान प्राप्ति होती है 
शेष फिर  >>>>>>
आप सब का कल्याण हो 
जय शिव भोले 
वास्तुअचार्य 
अवतार सिंह 
९०१३२०३०४०

RUDRAKSH

प्रभु भोले शंकर सदा शिव का प्रिय आभूषण रुद्राक्ष ही तो है 
रक्त विकार को दूर करते हुए रक्तचाप को नियंत्रित करके हिर्देय
रोग व् अन्य मानव शरीर  के  ताप ख़तम करने की शक्ति प्रसाद रूप में रुद्राक्ष ही तो देते हैं 
मानसिक वैचारिक शारीरिक ओर अध्यात्मिक उर्जा से भरपूर शक्ति तो हम सब को 
यह शिव के प्राकर्तिक रूप का प्रशाद रुद्राक्ष के रूप में ही प्राप्त हो सकती है  
फिर क्यूं हम नकारात्मक शक्ति से 
भरकर इन रुद्राक्ष का प्रशाद सवीकार नहीं करते   ज्ञान की कमी है या विश्वाश की   आप जाने 
लेकिन रुद्राक्ष की शक्ति कम नहीं हो सकती 
जेसे समयानुसार कोई भी दवा काम करती है रोग के बाद जाने पर दवा काम कम करेगी वेसे ही  
समय पर रोग आने से पहले ,किसी समस्या के उभरने से पहले दवा ले ली जाए उसी परकार
अपनी जन्म लगन ,चंदर ,सूर्य कुंडली के अधर पर जीवन में आने वाली समस्याओं  का 
समाधान करने के लिए रुद्राक्ष धारण करने का शुभ प्रभाव देखा गया है 
हाँ कुछ लोग प्रशन करते हैं की रुद्राक्ष धारण करने पर नियमो का पालन करना पड़ेगा >> जेसे नशा आदि छोड़ना पड़ेगा ( अगर आप जानते ही हैं की यह बुरा काम है तो     अरे >> करते ही क्यूं हो >> छोड़ क्यूं नहीं देते अरे जान बुझ कर गलत काम ) मत करो छोड़ दो वो सब जिस से कोई लाभ नहीं /  
अगर रत्न धारण करोगे तो वो भी तो देव देवी के रतन हैं   उनकी प्रतिष्ठा  भी तो देव देवी के मंत्रून से ही होती है
वो सब भी पुजनिये  हैं
अतः  बुरी भावनाओं को छोड़ कर संसार की व्याधियों  को दूर करने के लिए शिव प्रशाद रूप में रुद्राक्ष धारण करे 
फ्री जानकारी के लिए  फ़ोन पर संपर्क कर सकते हैं
कल्याण हो
वास्तुअचार्य 
अवतार सिंह 
९०१३२०३०४०





 

vaastu

नियमों के पालन करने से /
शेष फिर कभी >>>>>>>>>>
वास्तु अवतार 
९०१३२०३०४०





HOROSCOPE TEVA KUNDLI

नियमों के पालन करने से /
शेष फिर कभी >>>>>>>>>>
वास्तु अवतार 
९०१३२०३०४०





VAASTU ASTROLOGY

ASTROLOGY

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