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मंगलवार, 16 अगस्त 2011

उज्जैन


उज्जैन विशव का नाभि स्थल कहा जाता है
, यहीं से कर्क और मध्य रेखा गुजरती हैं , जिस जातक की कुंडली में मंगल दोष कष्ट
दे रहा हो उसके लिए इसी स्थान पर मंगल दोष निवारणकिया जाना ज्यादा शुभ कहा गया है

 वास्तु आचार्य
अवतार सिंह
 

सोमवार, 15 अगस्त 2011

रवि सूर्य कुछ कह रहे हैं

As we all know that we have 26 alphabets in English, as given below?

A B C D E F G H I J K L M N O P Q R
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18
S T U V W X Y Z
19 20 21 22 23 24 25 26

With each alphabet getting a number, in chronological order, as above, study the following, and bring down the total to a single digit and see the result yourself

Hindu
S h r e e K r i s h n a
19+8+18+5+5+11+18+9+19+8+14+1=​135=9

M u s l i m
M o h a m m e d
13+15+8+1+13+13+5+4=72=9

Jain
M a h a v i r
13+1+8+1+22+9+18=72=9

Sikh
G u r u N a n a k
7+21+18+21+14+1+14+1+11=108=9

Parsi
Z a r a t h u s t r a
26+1+18+1+20+8+21+19+20+18+1=1​53=9

Buddhist
G a u t a m
7+1+21+20+1+13=63=9

Christian
Esa Messiah
5+19+1+13+5+19+19+9+1+8=99=18=​9
Each one ends with number 9
THAT IS NATURE’S CREATION.
ALMIGHTY is ONE for all HUMANE BEING
BUT YET MAN FIGHTS WITH MAN, ON THIS EARTH
in the name of
RELIGION

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

आरती

आरती ,पूजा का एक विशेष चरण जो की हर प्राथना कार्य के बाद विशेष सामग्री और पदार्थों के साथ की जाती है, आरती के समय तीन बार पुष्प अर्पित किए जाते है
आरती के समय घंटी , नगाड़े का विशेष रूप से पर्योग भी किया जाता है, इस के पीछे भी कई वैज्ञानिक कारन निहित हैं,
आरती के वास्ते पञ्च प्रदीप जलाना आवश्यक है ,आरती कर्पूर व् विषम संख्या की बाटी से की जाती है ,आरती पञ्च प्रकार से की जा सकती है
१ शंख में गंगा जल भर कर ,२ दीप से,३ कर्पूर से ४ पीपल के पत्तो से शरीर के पांचो अंग से..दोनों हाथ और पाँव और मष्तिक .
पञ्च प्राणों की प्रतीक आरती शरीर के पञ्च प्राणों की प्रतीक ही है घी की ज्योति आत्मा जी ज्योति का प्रतीक है.
आरती के लिए सामग्री के रूप में कलश और उसमें विशेष ओषिध सामिग्री भी डाली जाती हैं
कलश का रूप भी एक विशेष आकार का होता है , जिसमें कलश का बीच का खाली स्थान शिव का स्थान होता है , आरती के समय कलश से पूजा करते हुए हम शिव जी से एकाकार हो जाते हैं , समुंदर मंथन के समय भगवन विष्णु जी ने कलश धारण किया था , और सभी देवताओं का वास भी कलश में होता है , क्योंकि जल में देवताओं का वास माना जाता है,
नारियल की शिखाओं में सकारात्मक उर्जा का भण्डार होता है, आरती गाते हुए नारियल की शिखाओं की उर्जा कलश के जल में जाती है , और जल औषध और अमृत मई हो जाता है
कलश में सोना चाँदी या ताम्बा डालना त्याग का प्रतीक होता है, और इस धातु से सात्विक गुणों का समावेश जल में होता है , जल में सुपारी डालने से भी हमारे शरीर की रजोगुण को समाप्त कर देती हैं हमारे शारीर में अछे गुण धारण करने की शक्ति बड़ जाती है
पण की बेल जिसे नाग्बेल भी कहते हैं , यह भूलोक और ब्रह्मलोक को जोड़ने की कड़ी कहा जाता है , देव मूर्ति से उत्तपन सकारात्मक उर्जा पान के डंटल द्वारा प्राप्त की जाती है
और तुलसी दल में वातावरण को शुद्ध करने की उर्जा ले लिए ही तुलसा दल का होना अति आवश्यक मन जाता है.

दीप और हम

उज्जवल भविष्य के लिए कब और कहां दीप जलाने का शुभ फल मिलेगा ... आओ जाने
शिव गौरी जी के मंदिर में जलाएं दीपक और करें प्राथना    शुभ    मंगल मई विवाह के वास्ते और पाएं आशीर्वाद
विष्णु जी और केले का वृक्ष>> शुद्ध घी का दीपक आपको दे सकता है स्वास्थ्य और सुन्दर शरीर
बाधा दूर करने के वास्ते गणेश जी की बुधवार और गुरुवार को शुद्ध गाए के घी से पूजा करने से कामनाएं पूरी होती देखी जाती हैं
माँ दुर्गा जी के मंदिर में करो दीप माला और पाओ आशीर्वाद, विशेषकर शुकर्वार को
शनिवार का दिन हो और हनुमान जी को व् शनिदेव को करें प्रसन दीपक जला कर
वास्तु आचार्य
अवतार सिंह
9013203040

शनिवार, 6 अगस्त 2011

मित्र को सन्देश

शनि में चन्द्रमा , या चन्द्र में शनि का दशा काल आर्थिक रूप में कष्ट देता है