लोकप्रिय पोस्ट

बुधवार, 22 जून 2011

'आदर्श समाज' ?????????

ओशो कहते हैं, मनुष्य-जाति जिस कुरूपता और अपंगता में फंसी है, उसके मूलभूत कारण शिक्षा में ही छिपे हैं।
जीवन के वृक्ष पर कड़वे और विषाक्त फल देखकर क्या गलत बीजों के बोए जाने का स्मरण नहीं आता है?
बीज गलत नहीं तो वृक्ष पर गलत फल कैसे आ सकते हैं?
वृक्ष का विषाक्त फलों से भरा होना बीज में प्रच्छन्न विष के अतिरिक्त और किस बात की खबर है?
मनुष्य गलत है तो निश्चय ही शिक्षा सम्यक नहीं है

क्या कुछ बदल सकते हैं हम अपने को अपने समाज को ?
शायद नहीं  बहुत देर हो चुकी है

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें